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न्यायिक सुधारों पर कार्रवाई अनुसंधान और अध्ययन योजना

संक्षिप्त जानकारी

न्यायिक सुधारों पर कार्रवाई अनुसंधान और अध्ययन योजना, न्याय विभाग द्वारा 26 सितंबर 2013 को शुरू की गई, न्याय वितरण और न्यायिक सुधारों पर शोध, मूल्यांकन अध्ययन, सेमिनार, क्षमता निर्माण और प्रकाशनों को फंड करती है। वित्तीय सहायता प्रति परियोजना Rs 25,00,000 तक सीमित है। यह केवल प्रस्ताव जमा करने के लिए आमंत्रित नामित संस्थानों के लिए खुली है, व्यक्तियों के लिए नहीं।

आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करें ↗ हेल्पलाइन: 011-24303714 (myScheme helpdesk, 9:00 AM to 5:30 PM)
Benefit
न्यायिक सुधारों पर शोध, अध्ययन, सेमिनार, क्षमता निर्माण और प्रकाशनों के लिए प्रति परियोजना Rs 25,00,000 तक वित्तीय सहायता
Maximum benefit
Rs 25,00,000
How to apply
By invitation (project proposals from selected institutions)
Helpline
011-24303714 (myScheme helpdesk, 9:00 AM to 5:30 PM)

न्यायिक सुधारों पर कार्रवाई अनुसंधान और अध्ययन योजना क्या है?

न्यायिक सुधारों पर कार्रवाई अनुसंधान और अध्ययन योजना को न्याय विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा 26 सितंबर 2013 को शुरू किया गया था। योजना विवरण के अनुसार, इसका उद्देश्य न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन से जुड़े मुद्दों पर शोध और अध्ययन को बढ़ावा देना है, जिसे न्याय विभाग लागू करता है।

यह योजना न्याय वितरण, कानूनी शोध और न्यायिक सुधारों के क्षेत्रों में कार्रवाई अनुसंधान, मूल्यांकन अध्ययन, निगरानी अध्ययन, क्षमता निर्माण, रिपोर्ट प्रकाशन और नवाचारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता देती है। वित्तीय सहायता प्रति परियोजना Rs 25,00,000 (पच्चीस लाख रुपये) की समग्र सीमा के अधीन है, हालांकि परियोजना स्वीकृति समिति बड़े दायरे, सैंपल आकार या परियोजना अवधि वाले असाधारण मामलों में इस सीमा में छूट दे सकती है।

यह एक संस्थागत शोध-वित्तपोषण योजना है, व्यक्तिगत लाभ नहीं। यह शुरू से ही समझना जरूरी है: किसी नागरिक, वकील, वादी या छात्र के लिए कोई आवेदन फॉर्म नहीं है। यह योजना संस्थानों की एक तय सूची से आमंत्रित परियोजना प्रस्तावों के जरिए काम करती है, और फंडिंग अनुदान प्राप्त संस्थान को जाती है, किसी व्यक्ति को नहीं।

योजना की मुख्य विशेषताएं

  • 26 सितंबर 2013 को न्याय विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा शुरू की गई।
  • न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन को सहयोग देती है।
  • शोध, मूल्यांकन व निगरानी अध्ययन, सेमिनार व सम्मेलन, क्षमता निर्माण, प्रकाशन, और नवाचारी कार्यक्रमों को फंड करती है।
  • वित्तीय सहायता प्रति परियोजना Rs 25,00,000 तक सीमित, असाधारण मामलों में छूट योग्य।
  • केवल नामित संस्थानों के लिए, आमंत्रण द्वारा, व्यक्तियों के लिए नहीं।

न्यायिक सुधारों पर कार्रवाई अनुसंधान और अध्ययन योजना के लिए कौन पात्र है?

पात्र आवेदक सीमित संख्या में निर्दिष्ट संस्थानों तक सीमित हैं। यह योजना निम्नलिखित को पात्र सूचीबद्ध करती है:

  • भारतीय लोक प्रशासन संस्थान
  • भारतीय प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज
  • भारतीय प्रबंधन संस्थान
  • इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट
  • राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय
  • राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद
  • राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी
  • राज्य न्यायिक अकादमियां

संस्थान को इनमें से किसी एक क्षेत्र में काम कर रहा होना चाहिए: न्याय वितरण; कानूनी शिक्षा और शोध; या न्यायिक सुधार। इसके अलावा, किसी सरकारी संस्थान या संगठन, या सरकार-सहायता प्राप्त संस्थान या संगठन को अनुमति दी जा सकती है अगर परियोजना स्वीकृति समिति उसे योजना के तहत अनुमत परियोजना करने के लिए उपयुक्त पाती है।

कौन आवेदन नहीं कर सकता: व्यक्तिगत नागरिक, शोधकर्ता, अधिवक्ता, कानून के छात्र और एनजीओ व्यक्तिगत अनुदान के लिए आवेदन नहीं कर सकते। यह योजना कोई खुली, पहले-आओ-पहले-पाओ फंडिंग लाइन नहीं है: संस्थानों को न्याय विभाग द्वारा चुना और आमंत्रित किया जाता है, इसलिए कोई पात्र संस्थान भी अनायास प्रस्ताव जमा नहीं कर सकता; उसे किसी पहचाने गए विषय के लिए आमंत्रित किया जाता है।

यह योजना क्या फंड करती है

योजना के अनुसार, वित्तीय सहायता निम्न के लिए दी जाती है:

  • न्याय वितरण, कानूनी शोध और न्यायिक सुधारों में कार्रवाई अनुसंधान, मूल्यांकन अध्ययन और निगरानी अध्ययन
  • प्रासंगिक विषयों पर सेमिनार, सम्मेलन और कार्यशालाएं
  • शोध व निगरानी गतिविधियों के लिए क्षमता निर्माण
  • रिपोर्ट या सामग्री का प्रकाशन
  • न्याय वितरण, कानूनी शोध और न्यायिक सुधारों में नवाचारी कार्यक्रमों या गतिविधियों को बढ़ावा देना

वित्तीय सहायता कैसे जारी की जाती है?

पात्र कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा जमा किए गए परियोजना प्रस्ताव के आधार पर सहमत शर्तों पर वित्तीय सहायता दी जाती है, और यह सख्ती से अनुदान प्राप्त संस्थान द्वारा किए गए वास्तविक खर्च तक सीमित है। यह योजना निम्न वितरण शर्तें तय करती है:

  • सहायता किस्तों में दी जा सकती है।
  • परियोजना लागत का कम से कम 10% अंतिम किस्त के रूप में भुगतान के लिए रखा जाता है।
  • अंतिम किस्त केवल न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन, न्याय विभाग द्वारा अंतिम परियोजना रिपोर्ट स्वीकार करने पर ही जारी होती है।
  • हर किस्त विधि एवं न्याय मंत्रालय के इंटीग्रेटेड फाइनेंस डिवीजन की मंजूरी के बाद ही जारी होती है।

किन दस्तावेजों की आवश्यकता है?

दस्तावेज़ अनिवार्य नोट्स
परियोजना प्रस्ताव हां उद्देश्य, कार्यप्रणाली, समय-सीमा और पूरा लागत विवरण
संस्थागत पात्रता प्रमाण हां प्रमाण कि आवेदक संबंधित क्षेत्र में एक पात्र संस्थान है
वित्तीय और व्यय विवरण हां सहायता वास्तविक किए गए खर्च तक सीमित है

न्यायिक सुधारों पर कार्रवाई अनुसंधान और अध्ययन योजना के लिए आवेदन कैसे करें (apply kaise kare)

यह योजना खुली आवेदन प्रणाली से नहीं चलती। योजना दिशानिर्देशों में बताई गई प्रक्रिया पूरी तरह आमंत्रित संस्थागत प्रस्तावों के माध्यम से काम करती है:

  1. प्रस्तावों के लिए आमंत्रण, न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन, न्याय विभाग, विषयों की पहचान करता है और चुनी गई कार्यान्वयन एजेंसियों (पात्र संस्थानों में से) को प्रस्ताव जमा करने के लिए आमंत्रित करता है।
  2. प्रस्ताव की तैयारी और जमा करना — चुना गया संस्थान उद्देश्यों, कार्यप्रणाली, विस्तृत समय-सीमा और अनुमानित लागत का पूरा विवरण देते हुए व्यापक परियोजना प्रस्ताव तैयार करता है, और इसे न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन को जमा करता है।
  3. परियोजना स्वीकृति समिति द्वारा विचार: सभी प्रस्ताव परियोजना स्वीकृति समिति के सामने रखे जाते हैं। जब समिति इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट या राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के किसी प्रस्ताव पर विचार करती है, तो उन निकायों के निदेशक खुद को अलग कर लेते हैं। समिति का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता है।
  4. वित्तीय मंजूरी और जारी करना: समिति की स्वीकृति के बाद, प्रस्ताव विधि एवं न्याय मंत्रालय के इंटीग्रेटेड फाइनेंस डिवीजन के पास जाता है, और सहायता वास्तविक खर्च के विरुद्ध किस्तों में जारी की जाती है।

मदद और विवरण जांचने के लिए स्थान

चूंकि यह आमंत्रण द्वारा चलने वाली संस्थान-उन्मुख योजना है, संपर्क बिंदु न्याय विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय है, जो अपने पोर्टल doj.gov.in के जरिए, और विशेष रूप से न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन के जरिए काम करता है। व्यक्तिगत कानूनी-सहायता या शोध लाभ चाहने वाले नागरिकों को ध्यान देना चाहिए कि यह योजना उनके लिए नहीं है; नागरिकों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता विधिक सेवा प्राधिकरणों के जरिए अलग से दी जाती है, इस शोध-वित्तपोषण योजना से नहीं। योजना लिस्टिंग पर सामान्य प्रश्न मायस्कीम हेल्पडेस्क 011-24303714 (सुबह 9:00 से शाम 5:30 बजे) पर उठाए जा सकते हैं।

आवश्यक दस्तावेज़

Project proposal
Detailed proposal with objectives, methodology, timelines and a full breakdown of the estimated project cost.
Institutional eligibility proof
Evidence that the applicant is one of the eligible institutions working in justice delivery, legal education or judicial reforms.
Financial and expenditure statements
Statements of actual expenditure, as assistance is limited strictly to the actual cost incurred.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

न्यायिक सुधार शोध योजना कितनी फंडिंग देती है?

यह योजना प्रति परियोजना अधिकतम Rs 25,00,000 (पच्चीस लाख रुपये) तक वित्तीय सहायता देती है। परियोजना स्वीकृति समिति बड़े दायरे, सैंपल आकार या परियोजना अवधि वाले असाधारण मामलों में इस सीमा में छूट दे सकती है। सहायता सख्ती से अनुदान प्राप्त संस्थान द्वारा किए गए वास्तविक खर्च तक सीमित है।

न्यायिक सुधारों पर कार्रवाई अनुसंधान और अध्ययन योजना के लिए कौन पात्र है?

केवल नामित संस्थान पात्र हैं — भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, भारतीय प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज, भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी और राज्य न्यायिक अकादमियां — जो न्याय वितरण, कानूनी शिक्षा और शोध, या न्यायिक सुधारों में काम कर रहे हों।

क्या कोई व्यक्ति इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है?

नहीं। कोई व्यक्तिगत आवेदन नहीं है। यह योजना खुली आवेदन प्रणाली से नहीं चलती; न्याय विभाग विषय पहचानता है और चुने गए संस्थानों को प्रस्ताव जमा करने के लिए आमंत्रित करता है। व्यक्तिगत शोधकर्ता, वकील और छात्र व्यक्तिगत अनुदान के लिए आवेदन नहीं कर सकते।

यह योजना क्या फंड करती है?

यह योजना कार्रवाई अनुसंधान, मूल्यांकन अध्ययन और निगरानी अध्ययन; सेमिनार, सम्मेलन और कार्यशालाएं; अनुसंधान व निगरानी के लिए क्षमता निर्माण; रिपोर्ट और सामग्री का प्रकाशन; और न्याय वितरण, कानूनी शोध व न्यायिक सुधारों में नवाचारी कार्यक्रमों को बढ़ावा देना फंड करती है।

वित्तीय सहायता कैसे जारी की जाती है?

स्वीकृत परियोजना प्रस्ताव के आधार पर सहमत शर्तों पर किस्तों में सहायता जारी की जाती है, जो वास्तविक खर्च तक सीमित है। परियोजना लागत का कम से कम 10% अंतिम किस्त के लिए रखा जाता है, जो केवल न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन द्वारा अंतिम रिपोर्ट स्वीकार करने के बाद जारी होती है। हर किस्त के लिए इंटीग्रेटेड फाइनेंस डिवीजन की मंजूरी जरूरी है।

यह योजना कब शुरू हुई और कौन इसे चलाता है?

यह योजना 26 सितंबर 2013 को न्याय विभाग, विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी। यह न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन को सहयोग देती है। प्रस्तावों पर निर्णय एक परियोजना स्वीकृति समिति लेती है, और आधिकारिक पोर्टल doj.gov.in है।

व्यक्तिगत कानूनी सहायता कहां से मिलती है, इस शोध योजना से नहीं?

व्यक्तिगत कानूनी-सहायता या शोध लाभ चाहने वाले नागरिकों को ध्यान देना चाहिए कि यह योजना उनके लिए नहीं है; नागरिकों के लिए मुफ्त कानूनी सहायता विधिक सेवा प्राधिकरणों के जरिए अलग से दी जाती है, इस शोध-वित्तपोषण योजना से नहीं। इस योजना पर सामान्य सवाल मायस्कीम हेल्पडेस्क 011-24303714 पर उठाए जा सकते हैं।

एक आमंत्रित संस्थान इस योजना का स्टेटस कैसे चेक करता है?

चूंकि यह योजना आमंत्रण द्वारा चलती है, आमंत्रित संस्थान अपनी परियोजना की स्थिति के लिए सीधे न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन, न्याय विभाग से संपर्क करता है। कोई ऑनलाइन ट्रैकिंग पोर्टल विशेष रूप से इस योजना के लिए प्रकाशित नहीं है।

यदि मेरा संस्थान पात्र सूची में है तो प्रस्ताव कैसे जमा करें - चरण दर चरण?

1) न्याय वितरण एवं कानूनी सुधार राष्ट्रीय मिशन से आमंत्रण की प्रतीक्षा करें। 2) उद्देश्य, कार्यप्रणाली, समय-सीमा और लागत विवरण के साथ विस्तृत प्रस्ताव तैयार करें। 3) मिशन को प्रस्ताव जमा करें। 4) परियोजना स्वीकृति समिति की समीक्षा से गुजरें। 5) स्वीकृति के बाद इंटीग्रेटेड फाइनेंस डिवीजन की मंजूरी और किस्तों में भुगतान की प्रतीक्षा करें।

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लेखक: Aapt Dubey

समीक्षक: Rishu Dubey

अंतिम तथ्य-जांच: 1 अगस्त 2026