टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए (TNFCR)
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना चुने गए विद्वानों को राष्ट्रीय अभिलेखागार या किसी राष्ट्रीय संग्रहालय जैसी सांस्कृतिक संस्था में शोध करने के लिए हर महीने Rs 50,000 का मानदेय देती है। साल में अधिकतम 25 छात्रवृत्तियां (और 15 फेलोशिप) दो साल तक के लिए दी जाती हैं। विद्वान विज्ञापन जारी होने पर संबंधित नोडल संस्था को सीधे आवेदन करते हैं।
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए क्या है?
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए संस्कृति मंत्रालय की टैगोर राष्ट्रीय फेलोशिप सांस्कृतिक अनुसंधान (TNFCR) योजना के दो पुरस्कारों में से एक है। संस्कृति मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार, यह योजना सांस्कृतिक संस्थाओं को "पुनर्जीवित और सशक्त" करने के लिए शुरू की गई थी, ताकि विद्वान और शिक्षाविद उनसे जुड़कर ऐसे शोध परियोजनाओं पर काम करें जो संस्थाओं के अनदेखे संसाधनों — उनकी पांडुलिपियां, कलाकृतियां, पुरावशेष, अभिलेख और संग्रह — को सामने लाएं।
इस योजना के दो स्तर हैं। टैगोर राष्ट्रीय फेलोशिप उच्चतर सम्मान है, किंवदंती-स्तर की प्रतिष्ठा वाले विद्वानों के लिए, जिसमें Rs 80,000 प्रति माह मिलता है। टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योग्य लेकिन शुरुआती दौर के विद्वानों तथा युवा कलाकारों और प्रदर्शन-कलाकारों के लिए है, जिसमें Rs 50,000 प्रति माह का मानदेय मिलता है। चुना गया विद्वान या फेलो एक निर्धारित "नोडल संस्था" से जुड़ता है और वहां आपसी हित के किसी परियोजना पर काम करता है।
मुख्य विशेषताएं
- विद्वानों के लिए Rs 50,000 प्रति माह मानदेय; फेलो के लिए Rs 80,000 प्रति माह।
- साल में अधिकतम 25 छात्रवृत्तियां और 15 फेलोशिप दी जाती हैं।
- कार्यकाल अधिकतम दो साल का, असाधारण मामलों में विस्तार योग्य (बिना वेतन के)।
- भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों के लिए खुली (विदेशी लगभग एक-तिहाई फेलोशिप तक सीमित)।
- विद्वान को नोडल संस्था में और उसके साथ काम करना आवश्यक है।
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए पात्र कौन है?
छात्रवृत्ति स्तर, कौन आवेदन कर सकता है
- अच्छे शैक्षणिक रिकॉर्ड वाला विद्वान: कम से कम एक प्रकाशन; पुस्तक या किसी प्रतिष्ठित पत्रिका में शोध पत्र।
- दो साल का शोध या अध्यापन अनुभव।
- युवा कलाकारों और प्रदर्शन-कलाकारों को छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने हेतु स्पष्ट रूप से प्रोत्साहित किया जाता है।
फेलोशिप स्तर, कौन आवेदन कर सकता है
- ऐसे विद्वान जिन्होंने ज्ञान में उल्लेखनीय योगदान दिया हो, कम से कम दो एकल-लेखक मोनोग्राफ और शोध संचालन/निर्देशन या प्रदर्शन/अन्य कलाओं में तरजीही रूप से पांच साल के अनुभव के साथ।
- दिशानिर्देशों में आदर्श फेलो को ऐसे व्यक्ति के रूप में वर्णित किया गया है जो "अपने क्षेत्र में पहले ही 'किंवदंती' बन चुका है," और सलाह दी जाती है कि जो इस विवरण के करीब न हों वे फेलोशिप के लिए आवेदन न करें।
कौन आवेदन नहीं कर सकता
- जिस नोडल संस्था से जुड़ने के लिए आवेदक आवेदन करना चाहता है, उसके कर्मचारी उस संस्था में फेलोशिप या छात्रवृत्ति के लिए पात्र नहीं हैं।
- चयन समितियों के सदस्य (संस्थान-स्तरीय खोज-सह-स्क्रीनिंग समिति, ILSSC, और राष्ट्रीय चयन समिति, NSC) बोर्ड में सेवारत रहते हुए आवेदन नहीं कर सकते।
- जिन विद्वानों की अन्यत्र बड़ी प्रतिबद्धताएं हैं और जो कार्यकाल के अधिकतर समय नोडल संस्था में मौजूद नहीं रह सकते, उन्हें आवेदन न करने की सलाह दी जाती है; जो संस्था के शहर में नहीं रह सकते उन पर आमतौर पर विचार नहीं किया जाएगा (जब तक शोध में निरंतर उपस्थिति आवश्यक न हो)।
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति में कितना भुगतान मिलता है?
दिशानिर्देशों के अनुसार:
- छात्रवृत्ति मानदेय: Rs 50,000 प्रति माह। हालांकि, जो विद्वान भारत में किसी विश्वविद्यालय, कॉलेज, शोध संस्थान या सरकारी संस्था में सेवारत है, उसे ग्रेड पे सहित वही वेतन मिलता है जो वह अपनी मूल संस्था में पाता, और नियोक्ता का अनिवार्य भविष्य निधि योगदान उस मूल संस्था द्वारा दिया जाता है।
- फेलोशिप मानदेय: Rs 80,000 प्रति माह विदेश से आने वाले, गैर-शैक्षणिक/गैर-सरकारी सेटअप से आने वाले, या सेवानिवृत्त होकर पेंशन पर रह रहे फेलो के लिए; सेवारत भारतीय फेलो को भी इसी तरह मूल संस्था का वेतन मिलता है।
- जो फेलो पहले से ही अन्य स्रोतों से मानदेय स्तर तक पूरा वित्तपोषण पा रहा है, उसे सामान्यतः कोई मानदेय नहीं मिलता, लेकिन ऐसे फेलो को फिर भी आकस्मिक अनुदान और भत्ते मिलते हैं।
आकस्मिक अनुदान
- गैर-मंत्रालयी संस्थाओं के अंतर्गत विद्वानों को वास्तविक आधार पर Rs 10,000 प्रति माह की सीमा तक आकस्मिक अनुदान मिल सकता है।
- गैर-मंत्रालयी संस्थाओं के अंतर्गत फेलो को आकस्मिक व्यय (शैक्षणिक यात्राएं, शोध सहायक आदि) Rs 2.5 लाख प्रति वर्ष तक वापस मिल सकते हैं।
- गैर-मंत्रालयी संस्थाओं के अंतर्गत विदेशी और भारत-से-बाहर के विद्वानों/फेलो को कार्यकाल के दौरान एक बार आने-जाने का इकॉनमी हवाई किराया वापस मिलता है।
संस्कृति मंत्रालय की संस्थाओं के अंतर्गत फेलो और विद्वानों के लिए यह व्यय संबंधित संस्था अपने अनुदान-सहायता से वहन करती है।
विद्वान किन संस्थाओं में काम कर सकते हैं?
नोडल (भाग लेने वाली) संस्थाएं विशेषज्ञता के चार क्षेत्रों में बंटी हैं:
- समूह A — पुरातत्व, पुरावशेष, संग्रहालय और दीर्घाएं: जैसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा, भारतीय संग्रहालय (कोलकाता), सालार जंग संग्रहालय (हैदराबाद), और छत्रपति शिवाजी महाराज वस्तु संग्रहालय (मुंबई) जैसी गैर-मंत्रालयी संस्थाएं।
- समूह B — अभिलेखागार, पुस्तकालय और सामान्य विद्वता: जैसे भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार, राष्ट्रीय पुस्तकालय (कोलकाता), रामपुर रज़ा पुस्तकालय, खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी (पटना), और एशियाटिक सोसाइटी (मुंबई) व भांडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (पुणे) जैसी संस्थाएं।
- समूह C — मानवविज्ञान और समाजशास्त्र: जैसे भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (भोपाल) और क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र।
- समूह D — शिल्प, प्रदर्शन/दृश्य/साहित्यिक कलाएं: जैसे संगीत नाटक अकादमी, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, कलाक्षेत्र फाउंडेशन (चेन्नई), साहित्य अकादमी, और JNU का स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स।
शोध का विषय ऐसा होना चाहिए जिसे चुनी गई नोडल संस्था के संसाधनों के साथ उपयोगी रूप से आगे बढ़ाया जा सके, और परियोजना का परिणाम उस संस्था को लाभ पहुंचाना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज़ क्या हैं?
| दस्तावेज़ | अनिवार्य | टिप्पणी |
|---|---|---|
| आवेदन-पत्र | हां | चुनी गई नोडल संस्था को जमा किया जाता है |
| शोध प्रस्ताव / लेख | हां | दिशानिर्देशों के परिशिष्ट A के अनुसार |
| प्रकाशन रिकॉर्ड | हां | विद्वानों के लिए 1 प्रकाशन; फेलो के लिए 2 मोनोग्राफ |
| अनुभव प्रमाण | हां | 2 साल (विद्वान) / तरजीही रूप से 5 साल (फेलो) |
| कार्यकाल पूरा करने की घोषणा | हां | हस्ताक्षरित वचन |
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कैसे करें (apply kaise kare)
संस्थागत योजनाओं के विपरीत, यहां व्यक्तिगत विद्वान आवेदन करता है।
- विज्ञापन पर नज़र रखें। संस्कृति मंत्रालय और संबंधित संस्था इस योजना का विज्ञापन राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्रों तथा अपनी वेबसाइटों पर देती हैं, और पेशेवर संगठनों के माध्यम से इसे फैलाती हैं।
- सूची (परिशिष्ट B) में से नोडल संस्था चुनें जिसके संसाधन आपके प्रस्तावित शोध से मेल खाते हों, और उस संस्था के संग्रह का उपयोग करने वाली परियोजना बनाएं।
- अपना आवेदन तैयार करें। आवेदन-पत्र, परिशिष्ट A के अनुसार शोध प्रस्ताव, कार्य से नोडल संस्था को क्या लाभ होगा इस पर एक लेख, आपका प्रकाशन रिकॉर्ड, अनुभव प्रमाण, और चयनित होने पर कार्यकाल पूरा करने की घोषणा।
- विज्ञापन में दी गई समय-सीमा के भीतर सीधे संबंधित नोडल संस्था को जमा करें।
- छंटनी और चयन — संस्था की ILSSC योग्य आवेदनों की छंटनी करती है और अधिकतम छह को राष्ट्रीय चयन समिति (NSC) को भेजती है, जो अंतिम सिफारिश करती है। एक नोडल संस्था को साल में एक फेलोशिप और एक छात्रवृत्ति, या अधिकतम दो छात्रवृत्तियां दी जा सकती हैं।
यह योजना खोज और आमंत्रण की भी अनुमति देती है: संस्था या NSC स्वतः प्रतिष्ठित विद्वानों को प्रस्ताव देने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं, इसलिए चयन केवल विज्ञापन का जवाब देने वालों तक सीमित नहीं है।
कितने पुरस्कार दिए जाते हैं, और कितने समय के लिए?
यह योजना साल में अधिकतम 15 फेलोशिप और 25 छात्रवृत्तियां देने की परिकल्पना करती है। प्रत्येक नोडल संस्था को साल में एक फेलोशिप और एक छात्रवृत्ति, या अधिकतम दो छात्रवृत्तियां दी जा सकती हैं (मंत्रालय विवेक से इन संख्याओं में छूट दे सकता है)। कार्यकाल अधिकतम दो साल का है; असाधारण मामलों में एक और साल के विस्तार की सिफारिश की जा सकती है, लेकिन विस्तार के दौरान आकस्मिक अनुदान सहित कोई पारिश्रमिक देय नहीं है।
सहायता और विवरण जांचने की जगह
योजना दिशानिर्देश, आवेदन-पत्र, विज्ञापन और एक संपर्क-विवरण शीट संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट पर टैगोर राष्ट्रीय फेलोशिप सांस्कृतिक अनुसंधान के अंतर्गत प्रकाशित हैं, और यह योजना राष्ट्रीय myScheme पोर्टल पर भी सूचीबद्ध है। मंत्रालय ने इस योजना के लिए कोई सामान्य टोल-फ्री हेल्पलाइन प्रकाशित नहीं की है; दिशानिर्देश आवेदकों को उनकी चुनी हुई नोडल संस्था से संपर्क करने का निर्देश देते हैं, और मंत्रालय के पेज पर एक योजना-विशिष्ट संपर्क-विवरण शीट उपलब्ध है। क्योंकि समय-सीमाएं हर विज्ञापन के साथ तय होती हैं और संस्था के अनुसार अलग हो सकती हैं, आवेदकों को आवेदन से पहले वर्तमान चक्र की समय-सीमा सीधे नोडल संस्था से पुष्टि करनी चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज़
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति में कितना भुगतान मिलता है?
टैगोर राष्ट्रीय विद्वान को Rs 50,000 प्रति माह मानदेय मिलता है। जो विद्वान भारत में किसी विश्वविद्यालय, कॉलेज, शोध संस्थान या सरकारी संस्था में सेवारत हैं, उन्हें ग्रेड पे सहित वही वेतन मिलता है जो वे अपनी मूल संस्था में पाते। उच्च स्तर की टैगोर राष्ट्रीय फेलोशिप में Rs 80,000 प्रति माह मिलता है।
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए पात्रता क्या है?
अच्छे शैक्षणिक रिकॉर्ड वाला विद्वान — कम से कम एक प्रकाशन (पुस्तक या किसी प्रतिष्ठित पत्रिका में शोध पत्र) और दो साल का शोध या अध्यापन अनुभव — पात्र है। युवा कलाकार और प्रदर्शन-कलाकार भी आवेदन कर सकते हैं। फेलोशिप स्तर में वहीं किंवदंती-स्तर की प्रतिष्ठा, कम से कम दो एकल-लेखक मोनोग्राफ और तरजीही रूप से पांच साल के शोध अनुभव की अपेक्षा होती है।
टैगोर फेलोशिप और छात्रवृत्ति में क्या अंतर है?
फेलोशिप उच्च स्तर का पुरस्कार है — साल में अधिकतम 15 — असाधारण, किंवदंती-स्तर की प्रतिष्ठा वाले विद्वानों के लिए, जिसमें Rs 80,000 प्रति माह मिलता है। छात्रवृत्ति — साल में अधिकतम 25 — योग्य लेकिन शुरुआती दौर के विद्वानों के लिए है, जिसमें Rs 50,000 प्रति माह मिलता है, और युवा कलाकारों व प्रदर्शन-कलाकारों के लिए भी खुली है। दोनों दो साल तक चलती हैं।
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए कौन आवेदन नहीं कर सकता?
जिस नोडल संस्था से जुड़ने के लिए आवेदक ने आवेदन किया है, उसके कर्मचारी आवेदन नहीं कर सकते, और चयन समितियों (ILSSC/NSC) के सदस्य भी बोर्ड में सेवारत रहते हुए आवेदन नहीं कर सकते। जो विद्वान कार्यकाल के अधिकतर समय नोडल संस्था के शहर में मौजूद नहीं रह सकते, या जिनकी अन्यत्र भारी प्रतिबद्धताएं हैं, उन्हें भी आवेदन न करने की सलाह दी जाती है।
छात्रवृत्ति कितने समय तक चलती है?
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति अधिकतम दो साल तक चलती है। असाधारण मामलों में एक नोडल संस्था एक और साल के विस्तार की सिफारिश कर सकती है, लेकिन विस्तार के दौरान विद्वान को आकस्मिक अनुदान सहित कोई भी पारिश्रमिक नहीं मिलता।
विद्वान किन संस्थाओं में काम कर सकते हैं?
विद्वान सूचीबद्ध नोडल संस्थाओं में से किसी एक से जुड़ते हैं, जो चार क्षेत्रों में बंटी हैं — पुरातत्व और संग्रहालय (जैसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय संग्रहालय); अभिलेखागार और पुस्तकालय (जैसे राष्ट्रीय अभिलेखागार, राष्ट्रीय पुस्तकालय); मानवविज्ञान और समाजशास्त्र; और शिल्प एवं प्रदर्शन/दृश्य/साहित्यिक कलाएं (जैसे संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी)। कुछ गैर-मंत्रालयी संस्थाएं भी शामिल हैं।
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कैसे करें?
राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार पत्रों तथा संस्कृति मंत्रालय व नोडल संस्था की वेबसाइटों पर विज्ञापन देखें, फिर विज्ञापित समय-सीमा के भीतर चुनी गई नोडल संस्था को सीधे आवेदन-पत्र, शोध प्रस्ताव, प्रकाशन रिकॉर्ड और कार्यकाल पूरा करने की घोषणा के साथ आवेदन करें। व्यक्तिगत विद्वान ही आवेदन करते हैं — इसके लिए कोई एकल ऑनलाइन भुगतान पोर्टल या बिचौलिया नहीं है।
क्या विदेशी नागरिक टैगोर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकते हैं?
हां। यह योजना भारतीय और विदेशी दोनों नागरिकों के लिए खुली है, लेकिन साल में दी जाने वाली कुल फेलोशिप में विदेशियों का अनुपात आमतौर पर एक-तिहाई से अधिक नहीं होगा। गैर-मंत्रालयी संस्थाओं के अंतर्गत विदेशी विद्वानों को कार्यकाल के दौरान एक बार आने-जाने का इकॉनमी हवाई किराया भी वापस मिल सकता है।
पीएम-किसान की अगली किस्त कब आएगी जैसा सवाल — इस योजना में स्टेटस कैसे देखें?
यह छात्रवृत्ति एक बार तय मानदेय है, इसमें किश्तों जैसा चक्र नहीं है। मानदेय और आकस्मिक अनुदान की वर्तमान स्थिति जानने के लिए सीधे उस नोडल संस्था से संपर्क करें जिससे आप जुड़े हैं, या संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट culture.gov.in पर दी गई संपर्क-विवरण शीट देखें।
टैगोर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कैसे करें (चरण-दर-चरण)?
1) संस्कृति मंत्रालय और नोडल संस्थाओं की वेबसाइटों तथा समाचार पत्रों में विज्ञापन देखें। 2) अपने शोध विषय से मेल खाती नोडल संस्था चुनें। 3) आवेदन-पत्र, शोध प्रस्ताव, प्रकाशन सूची, अनुभव प्रमाण और घोषणा-पत्र तैयार करें। 4) निर्धारित समय-सीमा के भीतर सीधे नोडल संस्था को जमा करें। 5) संस्था की ILSSC छंटनी के बाद राष्ट्रीय चयन समिति (NSC) अंतिम चयन करती है।
TNFCR scholarship ke liye online apply kaise kare?
TNFCR के लिए कोई एकल ऑनलाइन पोर्टल नहीं है। संस्कृति मंत्रालय व नोडल संस्था की वेबसाइटों और समाचार पत्रों में विज्ञापन देखें, फिर विज्ञापित समय-सीमा के भीतर चुनी गई नोडल संस्था को सीधे आवेदन-पत्र, शोध प्रस्ताव और प्रकाशन रिकॉर्ड के साथ आवेदन भेजें।
TNFCR ka status kaise check kare?
इस छात्रवृत्ति के लिए कोई ऑनलाइन ट्रैकिंग डैशबोर्ड नहीं है। मानदेय या चयन की वर्तमान स्थिति जानने के लिए सीधे उस नोडल संस्था से संपर्क करें जिससे आप जुड़े हैं, या संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइट culture.gov.in पर दी गई संपर्क-विवरण सूची देखें।
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