जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र (JRCPC)
जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र योजना राष्ट्रीय जूट बोर्ड को ऐसे प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केंद्र स्थापित करने देती है जहां लगभग 20 लोगों के एक बैच को जूट विविध उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। NGO, SHG या सहकारी समिति जैसी कार्यान्वयन एजेंसी हर केंद्र चलाती है और प्रति प्रशिक्षण चक्र लगभग Rs 2.14 लाख तक की वित्तीय सहायता पाती है। संगठन आवेदन करते हैं, व्यक्ति नहीं।
जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र योजना क्या है?
जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र (JRCPC) योजना वस्त्र मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय, राष्ट्रीय जूट बोर्ड (NJB) द्वारा चलाई जाती है। यह देशभर में प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केंद्र स्थापित करती है जहां लोगों को, खासकर महिलाओं, ग्रामीण श्रमिकों और कारीगरों को: बैग, गृह सज्जा और हस्तशिल्प जैसे जूट विविध उत्पाद (JDP) बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है, और उस कौशल को आजीविका में बदलने में मदद की जाती है।
राष्ट्रीय जूट बोर्ड के अनुसार, हर केंद्र एक कार्यान्वयन एजेंसी द्वारा चलाया जाता है, एक NGO, महिला स्वयं सहायता समूह, सहकारी समिति या ट्रस्ट — जो प्रति चक्र लगभग 20 लाभार्थियों के बैच को प्रशिक्षित करती है। एजेंसी प्रशिक्षण चलाने की लागत को कवर करने के लिए प्रति चक्र लगभग Rs 2.14 लाख तक की वित्तीय सहायता पाती है, सफल समापन पर एक अतिरिक्त प्रोत्साहन भी देय है। यह योजना जूट को प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में बढ़ावा देने के सरकार के व्यापक प्रयास में भी फिट बैठती है।
मुख्य विशेषताएं
- केंद्र जूट विविध उत्पादों में बुनियादी, उन्नत और डिज़ाइन प्रशिक्षण देते हैं।
- हर बैच लगभग 20 लाभार्थियों को प्रशिक्षित करता है।
- कार्यान्वयन एजेंसी को प्रति चक्र लगभग Rs 2.14 लाख तक की सहायता मिलती है, साथ ही समापन प्रोत्साहन।
- प्रशिक्षुओं को कच्चा माल, डिज़ाइन सहायता और NJB मार्केटिंग आउटलेट व प्रदर्शनियों से जोड़ा जाता है।
JRCPC योजना के लिए कौन पात्र है?
यह एक संस्थागत योजना है। आवेदक एक ऐसा संगठन है जो केंद्र चलाएगा, व्यक्तिगत अनुदान का दावा करने वाला व्यक्ति नहीं।
एक एजेंसी आवेदन कर सकती है यदि वह है:
- प्रशिक्षण आयोजित करने की क्षमता वाला एक पंजीकृत NGO, महिला स्वयं सहायता समूह (SHG), सहकारी समिति या ट्रस्ट।
- लगभग 20 प्रशिक्षुओं का बैच जुटाने और उपयुक्त स्थान प्रदान करने में सक्षम।
- राष्ट्रीय जूट बोर्ड के मानदंडों के अनुसार प्रशिक्षण और उत्पादन गतिविधि चलाने को इच्छुक।
कौन सीधे दावा नहीं कर सकता:
- व्यक्तिगत कारीगर सीधे नकद सहायता नहीं पा सकते। वे किसी केंद्र में प्रशिक्षु के रूप में भाग लेते हैं। अनुदान कार्यान्वयन एजेंसी को दिया जाता है।
- उचित कानूनी पंजीकरण या प्रशिक्षुओं का बैच जुटाने की क्षमता के बिना एजेंसियां केंद्र चलाने के लिए पात्र नहीं हैं।
कौन से दस्तावेज़ चाहिए?
| दस्तावेज़ | अनिवार्य | टिप्पणी |
|---|---|---|
| कार्यान्वयन एजेंसी का प्रस्ताव | हां | राष्ट्रीय जूट बोर्ड को जमा किया गया |
| एजेंसी का पंजीकरण प्रमाणपत्र | हां | सोसाइटी/ट्रस्ट/सहकारी समिति की स्थिति |
| प्रशिक्षुओं और केंद्र का विवरण | हां | लगभग 20 का बैच, स्थान और योजना |
| एजेंसी के बैंक खाते का विवरण | हां | सहायता जारी करने के लिए |
जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र के लिए आवेदन कैसे करें (JRCPC apply kaise kare)
- इच्छुक NGO, SHG, सहकारी समिति या ट्रस्ट jute.com पर राष्ट्रीय जूट बोर्ड के JRCPC दिशानिर्देश देखती है और पुष्टि करती है कि वह मानदंडों को पूरा करती है।
- एजेंसी प्रस्तावित केंद्र, स्थान, लगभग 20 प्रशिक्षुओं के बैच और प्रशिक्षण योजना बताते हुए एक प्रस्ताव तैयार करती है।
- एजेंसी अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र और बैंक विवरण के साथ राष्ट्रीय जूट बोर्ड को प्रस्ताव जमा करती है।
- राष्ट्रीय जूट बोर्ड प्रस्ताव का मूल्यांकन करता है और, यदि मंजूर होता है, केंद्र और वित्तीय सहायता को स्वीकृत करता है।
- एजेंसी प्रशिक्षण-सह-उत्पादन केंद्र चलाती है, और स्वीकृत शर्तों के अनुसार सहायता तथा कोई समापन प्रोत्साहन प्राप्त करती है।
जूट शिल्प सीखना चाहने वाले व्यक्तियों को सीधे बोर्ड को आवेदन करने के बजाय अपने पास चल रहा कोई स्वीकृत केंद्र ढूंढना चाहिए।
JRCPC योजना कितना लाभ देती है?
राष्ट्रीय जूट बोर्ड केंद्र चलाने वाली एजेंसी को प्रति प्रशिक्षण चक्र लगभग Rs 2.14 लाख तक की वित्तीय सहायता देता है, जो प्रशिक्षण अवधि में लगभग 20 लाभार्थियों के बैच के प्रशिक्षण की लागत को कवर करती है। गतिविधि के सफल समापन पर एजेंसी को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जा सकता है। व्यक्तिगत प्रशिक्षुओं को लाभ नकद नहीं बल्कि एक विक्रय-योग्य कौशल, साथ ही कच्चा माल, डिज़ाइन सहायता और बोर्ड के मार्केटिंग चैनलों तक पहुंच है।
मदद और सत्यापन के लिए
- राष्ट्रीय जूट बोर्ड, जूट भवन, ब्लॉक-CF, एक्शन एरिया-1, न्यू टाउन, कोलकाता 700156 — बोर्ड लाइन 033-22521100।
- JRCPC योजना दिशानिर्देश और फॉर्मेट jute.com पर प्रकाशित हैं।
क्योंकि सहायता राशि और बैच मानदंड राष्ट्रीय जूट बोर्ड के परिपत्रों द्वारा तय होते हैं जो समय-समय पर संशोधित होते हैं, प्रस्ताव जमा करने से पहले बोर्ड के साथ वर्तमान प्रति-चक्र आंकड़ा और पात्रता शर्तों की पुष्टि करें, और ऊपर दी राशि को संकेतात्मक मानें।
आवश्यक दस्तावेज़
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
कार्यान्वयन एजेंसियां आवेदन करती हैं — गैर-सरकारी संगठन (NGO), महिला स्वयं सहायता समूह (SHG), पंजीकृत सहकारी समितियां, ट्रस्ट और इसी तरह के निकाय। वे एक केंद्र चलाते हैं जो लगभग 20 लाभार्थियों के बैच को जूट विविध उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देता है। व्यक्तिगत कारीगर प्रशिक्षु के रूप में जुड़ते हैं पर सीधे अनुदान नहीं पाते।
JRCPC योजना कितनी सहायता देती है?
राष्ट्रीय जूट बोर्ड जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र चलाने वाली एजेंसी को प्रति प्रशिक्षण चक्र लगभग Rs 2.14 लाख तक की वित्तीय सहायता देता है, जो प्रशिक्षण अवधि में लगभग 20 लोगों के एक बैच के प्रशिक्षण की लागत को कवर करती है। सफल समापन पर एजेंसी को अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जा सकता है।
JRCPC योजना कौन सा निकाय चलाता है?
जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र योजना भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निकाय, राष्ट्रीय जूट बोर्ड (NJB) चलाता है, जिसका मुख्यालय जूट भवन, न्यू टाउन, कोलकाता में है।
क्या एक व्यक्तिगत कारीगर को JRCPC के तहत सीधे पैसा मिल सकता है?
नहीं। एक व्यक्तिगत कारीगर सीधे नकद अनुदान का दावा नहीं कर सकता। JRCPC सहायता उस कार्यान्वयन एजेंसी को जाती है जो केंद्र चलाती है। व्यक्तियों को केंद्र में प्रशिक्षु के रूप में जुड़कर, जूट विविध उत्पाद बनाना सीखकर, और कच्चे माल, डिज़ाइन व मार्केटिंग सहायता तक पहुंच पाकर लाभ मिलता है।
जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र में क्या सिखाया जाता है?
जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र जूट विविध उत्पाद बनाने का बुनियादी, उन्नत और डिज़ाइन प्रशिक्षण देता है — बैग, गृह सज्जा, हस्तशिल्प और अन्य पर्यावरण-अनुकूल वस्तुएं। केंद्र प्रशिक्षुओं को राष्ट्रीय जूट बोर्ड द्वारा चलाए जाने वाले कच्चे माल, डिज़ाइन सहायता और बाजार आउटलेट व प्रदर्शनियों से भी जोड़ते हैं।
एक केंद्र में कितने लोगों को प्रशिक्षित किया जाता है?
एक विशिष्ट जूट संसाधन-सह-उत्पादन केंद्र प्रति चक्र लगभग 20 लाभार्थियों के बैच को प्रशिक्षित करता है। यह योजना कुशल जूट कारीगरों, विशेषकर महिलाओं और ग्रामीण श्रमिकों का एक समूह बनाने के लिए है जो जूट विविध उत्पादों से आजीविका कमा सकें।
JRCPC ke liye apply kaise kare?
व्यक्तिगत कारीगर सीधे आवेदन नहीं करते; इच्छुक NGO, SHG, सहकारी समिति या ट्रस्ट jute.com पर राष्ट्रीय जूट बोर्ड के JRCPC दिशानिर्देश देखकर प्रस्तावित केंद्र, बैच और प्रशिक्षण योजना बताते हुए प्रस्ताव जमा करती है। प्रशिक्षु के तौर पर जुड़ने के इच्छुक व्यक्ति को अपने पास चल रहा कोई स्वीकृत केंद्र ढूंढना चाहिए।
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