अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फेलोशिप (एकेटीआईएनएफ)
अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फेलोशिप सार्वजनिक-वित्तपोषित संस्थानों में ट्रांसलेशनल रिसर्च करने वाले हर साल अधिकतम 10 इंजीनियरों को पहचान देती थी, जिसमें वेतन के अलावा 25,000 रुपये प्रति माह और पांच साल तक हर साल 15 लाख रुपये का रिसर्च ग्रांट मिलता था। यह आईएनएई द्वारा एसईआरबी/डीएसटी के साथ चलाई जाती थी, लेकिन एसईआरबी के एएनआरएफ बनने के बाद अब नए नामांकन स्वीकार नहीं किए जाते।
अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फेलोशिप क्या थी?
अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फेलोशिप (एकेटीआईएनएफ) 2017 में शुरू की गई एक रिसर्च फेलोशिप थी, जो भारत के सार्वजनिक-वित्तपोषित संस्थानों में इंजीनियरों और टेक्नोलॉजिस्टों द्वारा किए जाने वाले ट्रांसलेशनल रिसर्च को पहचान और सहायता देने के लिए बनाई गई थी। इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) के साथ भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी (आईएनएई) द्वारा प्रशासित किया जाता था। इसका नाम डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया था।
आईएनएई और डीएसटी के अनुसार, फेलोशिप में फेलो के वेतन के अलावा 25,000 रुपये प्रति माह, साथ ही 15 लाख रुपये प्रति वर्ष का रिसर्च ग्रांट और मेजबान संस्थान को 1 लाख रुपये प्रति वर्ष का ओवरहेड मिलता था। हर साल अधिकतम 10 फेलोशिप दी जाती थीं। उद्देश्य यह था कि स्थापित इंजीनियर अनुसंधान को उद्योग व समाज के लिए उपयोगी काम करने वाली तकनीक व नवाचार में बदल सकें।
मुख्य विशेषताएं (जैसा मूल रूप से दी गई थीं)
- फेलो के नियमित वेतन के अलावा 25,000 रुपये प्रति माह।
- 15 लाख रुपये प्रति वर्ष का रिसर्च ग्रांट, साथ ही मेजबान को 1 लाख रुपये ओवरहेड।
- शुरुआती कार्यकाल तीन साल, अधिकतम पांच साल तक बढ़ाया जा सकता था।
- हर साल इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं में अधिकतम 10 फेलोशिप।
- खुले आवेदन से नहीं, बल्कि नामांकन और मूल्यांकन से दी जाती थी।
मौजूदा स्थिति: अब नए नामांकन स्वीकार नहीं हो रहे
फेलोशिप अब नए नामांकनों के लिए खुली नहीं है। एसईआरबी को अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (एएनआरएफ) के रूप में पुनर्गठित किए जाने के बाद, एकेटीआईएनएफ अपने पहले वाले स्वरूप में जारी नहीं रही। इसका उद्देश्य — उच्च-प्रभाव वाले ट्रांसलेशनल इंजीनियरिंग रिसर्च को सहारा देना — अब एएनआरएफ के अपने कार्यक्रमों के अंतर्गत आता है। संभावित आवेदकों को एकेटीआईएनएफ की बजाय एएनआरएफ की ट्रांसलेशनल रिसर्च व इनोवेशन योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए। पुरानी योजना पर नजर रखने वाले किसी भी व्यक्ति को योजना बनाने से पहले आईएनएई या एएनआरएफ से सीधे मौजूदा स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।
फेलोशिप के लिए कौन पात्र था?
एक नामांकित व्यक्ति पर विचार किया जा सकता था यदि:
- वह भारत के किसी सार्वजनिक-वित्तपोषित संस्थान में काम करने वाला इंजीनियर या टेक्नोलॉजिस्ट हो।
- उसका काम ट्रांसलेशनल रिसर्च से जुड़ा हो — यानी अनुसंधान को उपयोगी तकनीक में बदलने का काम।
- उसकी मूल संस्था में कम से कम पांच साल की सेवा बाकी हो।
कौन आवेदन नहीं कर सकता था:
- फेलोशिप केवल नामांकन से मिलती थी; व्यक्ति अपनी ओर से सीधे आवेदन नहीं कर सकते थे।
- सार्वजनिक-वित्तपोषित संस्थानों के बाहर के शोधकर्ता, या जिनकी सेवा पांच साल से कम बची हो, वे पात्र नहीं थे।
- चूंकि योजना नए नामांकनों के लिए बंद है, अब किसी भी नए उम्मीदवार पर, चाहे उसकी योग्यता कितनी भी हो, एकेटीआईएनएफ के तहत विचार नहीं किया जा सकता।
कौन-से दस्तावेज़ चाहिए थे?
| दस्तावेज़ | अनिवार्य | नोट |
|---|---|---|
| नामांकन फॉर्म | हां | आईएनएई के जरिए निर्धारित एकेटीआईएनएफ फॉर्म |
| बायोडाटा और प्रकाशन रिकॉर्ड | हां | नामित व्यक्ति का |
| रिसर्च प्रस्ताव | हां | ट्रांसलेशनल रिसर्च की योजना |
| मेजबान संस्थान का अनुमोदन | हां | रोजगार और शेष सेवा की पुष्टि |
फेलोशिप के लिए आवेदन कैसे होता था (apply kaise kare)
फेलोशिप नामांकन-आधारित थी, और यह अब नए नामांकन स्वीकार नहीं कर रही। ऐतिहासिक संदर्भ के लिए, प्रक्रिया इस प्रकार थी:
- एक उम्मीदवार को फेलोशिप के लिए नामांकित किया जाता था — स्व-आवेदन का रास्ता नहीं था; मामले को आगे बढ़ाकर समर्थित करना होता था।
- नामांकन फॉर्म, बायोडाटा, प्रकाशन रिकॉर्ड और रिसर्च प्रस्ताव आईएनएई के जरिए (ईमेल से inaehq@inae.in पर पीडीएफ के रूप में) जमा किए जाते थे।
- मेजबान संस्थान नामित व्यक्ति के रोजगार का समर्थन करता था और कम से कम पांच साल की शेष सेवा की पुष्टि करता था।
- आईएनएई, एसईआरबी/डीएसटी के साथ मिलकर, हर साल अधिकतम 10 फेलो का चयन और मूल्यांकन करता था।
चूंकि योजना नए नामांकनों के लिए बंद है, यह रास्ता अभी उपलब्ध नहीं है। समान सहायता चाहने वाले इंजीनियरों को एएनआरएफ के सक्रिय ट्रांसलेशनल रिसर्च व इनोवेशन कार्यक्रमों से संपर्क करना चाहिए।
फेलोशिप कितना लाभ देती थी?
फेलोशिप में फेलो के वेतन के अलावा 25,000 रुपये प्रति माह, 15 लाख रुपये प्रति वर्ष का रिसर्च ग्रांट, और मेजबान संस्थान को 1 लाख रुपये प्रति वर्ष का ओवरहेड मिलता था। पुरस्कार तीन साल तक चलता था, जिसे प्रदर्शन के आधार पर दो साल और बढ़ाया जा सकता था, यानी अधिकतम पांच साल।
मदद और वर्तमान स्थिति
- आईएनएई: inaehq@inae.in
- आधिकारिक पेज: inae.in (अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फेलोशिप)
- वर्तमान अवसरों के लिए: अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (एएनआरएफ)
चूंकि एकेटीआईएनएफ नए नामांकनों के लिए बंद है, ऊपर दिए गए आंकड़ों को इस बात का रिकॉर्ड मानें कि योजना ने क्या दिया था। योजना बनाने से पहले आईएनएई या एएनआरएफ से मौजूदा समकक्ष व्यवस्था और उसकी शर्तों की पुष्टि जरूर करें।
आवश्यक दस्तावेज़
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फेलोशिप अभी भी खुली है?
नहीं। यह फेलोशिप अब नए नामांकन स्वीकार नहीं कर रही है। विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) को अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (एएनआरएफ) के रूप में पुनर्गठित किए जाने के बाद, यह योजना अपने पहले वाले स्वरूप में जारी नहीं रही, और ट्रांसलेशनल रिसर्च सहायता अब एएनआरएफ के कार्यक्रमों के तहत चलती है।
फेलोशिप में कितना भुगतान मिलता था?
फेलोशिप में फेलो के नियमित वेतन के अलावा 25,000 रुपये प्रति माह, साथ ही 15 लाख रुपये प्रति वर्ष का रिसर्च ग्रांट और मेजबान संस्थान को 1 लाख रुपये प्रति वर्ष का ओवरहेड मिलता था।
फेलोशिप के लिए कौन पात्र था?
भारत के सार्वजनिक-वित्तपोषित संस्थानों में काम करने वाले इंजीनियर और टेक्नोलॉजिस्ट जो ट्रांसलेशनल रिसर्च करते थे, और जिनकी मूल संस्था में कम से कम पांच साल की सेवा बाकी थी, वे नामांकन के लिए पात्र थे।
क्या कोई व्यक्ति सीधे आवेदन कर सकता था?
नहीं। फेलोशिप नामांकन से दी जाती थी, सीधे आवेदन से नहीं। उम्मीदवार को नामांकित किया जाना जरूरी था और मामले का मूल्यांकन आईएनएई एसईआरबी/डीएसटी के साथ करता था; व्यक्ति अपनी ओर से आवेदन नहीं कर सकते थे।
फेलोशिप कितने समय तक चलती थी?
फेलोशिप शुरुआत में तीन साल के लिए दी जाती थी, जिसे प्रदर्शन के आधार पर दो साल और बढ़ाया जा सकता था, यानी अधिकतम पांच साल का कार्यकाल।
हर साल कितनी फेलोशिप दी जाती थीं?
हर साल इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं में अधिकतम 10 फेलोशिप दी जाती थीं।
अब आवेदन बंद होने पर मुझे क्या करना चाहिए?
चूंकि एकेटीआईएनएफ नए नामांकन स्वीकार नहीं कर रही, ट्रांसलेशनल इंजीनियरिंग रिसर्च में समान सहायता चाहने वाले इंजीनियरों को अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (एएनआरएफ) के सक्रिय कार्यक्रमों से संपर्क करना चाहिए। मौजूदा विकल्प जानने के लिए inaehq@inae.in पर आईएनएई से या एएनआरएफ से सीधे पुष्टि करें।
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