रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एक योजना है, जिसे बिराक द्वारा संचालित किया जाता है, ताकि विदेश में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों को जैव प्रौद्योगिकी और जीवन विज्ञान अनुसंधान के लिए वापस भारत लाया जा सके। चयनित फेलो को पांच साल के कार्यकाल के लिए Rs 1,00,000 प्रति माह फेलोशिप के साथ शोध/आकस्मिक अनुदान मिलता है, जो किसी भारतीय संस्थान में मान्य होता है। डीबीटी-बिराक कॉल के तहत आवेदन करें।
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप क्या है?
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) की एक योजना है, जो विदेश में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों को जैव प्रौद्योगिकी और जीवन विज्ञान में अनुसंधान के लिए भारत लौटने के लिए प्रोत्साहित करती है। डीबीटी के अनुसार, यह फेलोशिप विदेश में मौजूद प्रतिभाशाली भारतीय शोधकर्ताओं के लिए एक आकर्षक री-एंट्री मार्ग देती है, जिससे उन्हें अपने देश में स्वतंत्र शोध करियर बनाने के लिए एक स्थिर आधार मिलता है। इस योजना का संचालन बिराक, यानी जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (Biotechnology Industry Research Assistance Council) करती है।
इस फेलोशिप का नाम डॉ. पी.एन. रामलिंगस्वामी के नाम पर रखा गया है, जो एक प्रसिद्ध भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक थे। इसका उद्देश्य उच्च प्रशिक्षित जीवविज्ञानियों और जैव प्रौद्योगिकीविदों के "ब्रेन ड्रेन" को उलटना है, जिसके लिए किसी मान्यता प्राप्त भारतीय संस्थान में फैकल्टी-स्तर के शोध पद के बराबर फंडिंग और दर्जा दिया जाता है।
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप एक शोध फेलोशिप है, न कि सामान्य सार्वजनिक कल्याण लाभ। यह हर साइकिल में कुछ चुने हुए, प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों को लक्षित करती है और डीबीटी-बिराक कॉल के खिलाफ प्रतिस्पर्धी रूप से भरी जाती है।
फेलोशिप क्या प्रदान करती है?
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप प्रदान करती है:
- चयनित फेलो को Rs 1,00,000 प्रति माह की फेलोशिप।
- फेलो के शोध कार्यक्रम को सहयोग देने के लिए शोध/आकस्मिक अनुदान, जिसमें उपभोग्य सामग्री, यात्रा और अन्य परियोजना खर्च शामिल हैं।
- जहां आवास उपलब्ध नहीं है, वहां होस्ट संस्थान में मान्य मकान किराया भत्ता (एचआरए)।
- किसी मान्यता प्राप्त भारतीय होस्ट संस्थान में पांच साल का कार्यकाल।
शोध अनुदान घटक और किसी भी ओवरहेड की राशि डीबीटी-बिराक स्कीम दिशानिर्देशों में तय की जाती है और समय-समय पर संशोधित होती है; सटीक शोध-अनुदान राशि की पुष्टि मौजूदा कॉल में करें। Rs 1,00,000 प्रति माह की फेलोशिप और पांच साल का कार्यकाल इस योजना की स्थापित मुख्य शर्तें हैं।
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप के लिए कौन पात्र है?
आप आवेदन कर सकते हैं यदि:
- आवेदन के समय आप विदेश में कार्यरत भारतीय नागरिक हैं।
- आपके पास किसी प्रासंगिक विषय में पीएचडी, एमडी या एमएस डिग्री है, साथ में विदेश में पोस्ट-डॉक्टोरल शोध अनुभव है।
- आप जैव प्रौद्योगिकी या जीवन विज्ञान के किसी संबद्ध क्षेत्र में अनुसंधान करने के लिए भारत लौटना चाहते हैं।
- आपके पास आपके शोध की मेजबानी करने को तैयार किसी मान्यता प्राप्त भारतीय होस्ट संस्थान की स्वीकृति है या आप इसे प्राप्त कर सकते हैं।
आप आवेदन नहीं कर सकते यदि:
- आवेदन के समय आपके पास आवश्यक विदेशी पोस्ट-डॉक्टोरल शोध अनुभव नहीं है।
- आप भारतीय नागरिक नहीं हैं, यह योजना खासतौर पर भारतीय वैज्ञानिकों के लिए एक री-एंट्री मार्ग है।
- आप जैव प्रौद्योगिकी और जीवन विज्ञान से बाहर की फंडिंग चाहते हैं, जो योजना के दायरे से बाहर है।
- आप पहले से भारत में नियमित फैकल्टी या शोध पद पर इस तरह हैं जो फेलोशिप के री-एंट्री उद्देश्य से टकराता है (सह-पद संबंधी सटीक शर्त के लिए मौजूदा कॉल पढ़ें)।
चूंकि सटीक आयु गणना, अनुभव विंडो और सह-पद नियम हर कॉल में नए सिरे से तय होते हैं, आवेदकों को मौजूदा डीबीटी-बिराक अधिसूचना ध्यान से पढ़नी चाहिए।
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप के लिए आवेदन कैसे करें (apply kaise kare)
यह फेलोशिप एक आवधिक डीबीटी-बिराक कॉल के खिलाफ भरी जाती है:
- डीबीटी (dbtindia.gov.in) और बिराक (birac.nic.in) पोर्टल पर रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप की डीबीटी-बिराक कॉल पर नज़र रखें।
- भारत में अपने प्रस्तावित शोध की मेजबानी करने को तैयार होस्ट संस्थान की पहचान कर उसे सुरक्षित करें, और उसकी स्वीकृति प्राप्त करें।
- अपनी डिग्री प्रमाण पत्र, विदेशी शोध अनुभव का प्रमाण, एक शोध प्रस्ताव और होस्ट संस्थान का पत्र के साथ अपना आवेदन तैयार करें।
- कॉल में बताए गए पोर्टल के जरिये, बताई गई अंतिम तिथि से पहले आवेदन ऑनलाइन जमा करें।
- चयन एक विशेषज्ञ समिति द्वारा किया जाता है जो उम्मीदवार के रिकॉर्ड और प्रस्ताव का मूल्यांकन करती है; शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों का साक्षात्कार भी हो सकता है, इसके बाद फेलोशिप दी जाती है।
यह योजना कहां फिट बैठती है
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप, डीबीटी और सरकार की अन्य री-एंट्री तथा शुरुआती-करियर शोध योजनाओं की पूरक है। यह जानबूझकर सीमित क्षेत्र वाली है — यह लौटने वाले भारतीय जीवविज्ञानियों के लिए एक प्रतिस्पर्धी, फैकल्टी-स्तर की फेलोशिप है, जो हर साइकिल में कम संख्या में दी जाती है, और इसे व्यापक सार्वजनिक लाभ की बजाय शोध-क्षमता योजना के रूप में समझना बेहतर है।
मदद और कहां जांचें
इस फेलोशिप की मौजूदा शर्तों, शोध अनुदान, पात्रता और खुली कॉल के लिए सबसे प्रामाणिक स्रोत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (dbtindia.gov.in) और बिराक (birac.nic.in) हैं। इस विशेष फेलोशिप के लिए कोई एक सार्वजनिक हेल्पलाइन नंबर प्रकाशित नहीं है; अपने प्रश्न डीबीटी/बिराक को उनके आधिकारिक पोर्टल के जरिये भेजें। सभी आंकड़ों की पुष्टि लाइव डीबीटी-बिराक कॉल से करें, क्योंकि शोध अनुदान और शर्तें हर साइकिल में संशोधित होती हैं।
आवश्यक दस्तावेज़
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप क्या है?
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) की एक योजना है, जिसे बिराक संचालित करता है, जो विदेश में काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों को जैव प्रौद्योगिकी और जीवन विज्ञान में अनुसंधान के लिए वापस लौटने में मदद करती है। चयनित फेलो को Rs 1,00,000 प्रति माह की फेलोशिप और भारतीय होस्ट संस्थान में पांच साल के कार्यकाल के लिए एक शोध अनुदान मिलता है।
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप कितना भुगतान करती है?
यह फेलोशिप फेलो को Rs 1,00,000 प्रति माह देती है, साथ ही शोध कार्यक्रम के लिए एक शोध/आकस्मिक अनुदान और होस्ट संस्थान में मान्य एचआरए भी मिलता है। सटीक शोध अनुदान राशि की पुष्टि मौजूदा डीबीटी-बिराक कॉल में करें, क्योंकि राशियां समय-समय पर संशोधित होती हैं।
फेलोशिप कितने समय तक चलती है?
यह फेलोशिप पांच साल के कार्यकाल के लिए दी जाती है, जो किसी मान्यता प्राप्त भारतीय होस्ट संस्थान में मान्य होती है। इसका उद्देश्य लौटने वाले वैज्ञानिकों को भारत में एक स्वतंत्र शोध कार्यक्रम स्थापित करने के लिए स्थिर, मध्यम अवधि का आधार देना है।
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप के लिए कौन पात्र है?
पीएचडी, एमडी या एमएस डिग्री रखने वाले, विदेश में पोस्ट-डॉक्टोरल शोध अनुभव रखने वाले, आवेदन के समय विदेश में कार्यरत और भारत लौटकर जैव प्रौद्योगिकी या जीवन विज्ञान में अनुसंधान करना चाहने वाले भारतीय नागरिक पात्र हैं। जिनके पास आवश्यक विदेशी शोध अनुभव नहीं है, या जो भारतीय नागरिक नहीं हैं, वे आवेदन नहीं कर सकते।
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप के लिए आवेदन कैसे करें?
जब डीबीटी-बिराक कॉल खुला हो तब आप ऑनलाइन आवेदन करते हैं, जिसमें अपनी डिग्री, विदेशी शोध अनुभव का प्रमाण, एक शोध प्रस्ताव और होस्ट संस्थान की स्वीकृति जमा करनी होती है। आवेदनों का मूल्यांकन एक विशेषज्ञ समिति करती है; इसमें कोई वॉक-इन या साल भर चलने वाला रास्ता नहीं है।
रामलिंगस्वामी री-एंट्री फेलोशिप किस विभाग द्वारा संचालित है?
यह फेलोशिप विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा चलाई जाती है, और इसे बिराक (जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद) संचालित करती है। इसका नाम प्रसिद्ध चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. पी.एन. रामलिंगस्वामी के नाम पर रखा गया है।
क्या इस फेलोशिप के लिए सीधे आवेदन कर सकते हैं या नामांकन जरूरी है?
आवेदन डीबीटी-बिराक की कॉल खुलने पर उम्मीदवार खुद कर सकता है, बशर्ते उसके पास पहले से या सुरक्षित किया जा सकने वाला भारतीय होस्ट संस्थान का स्वीकृति पत्र हो। यह किसी संस्थान के जरिये नामांकन की प्रक्रिया नहीं बल्कि सीधा आवेदन है।
शोध अनुदान और स्टेटस अपडेट कहां चेक करें?
चूंकि शोध अनुदान की राशि हर साइकिल में संशोधित हो सकती है, इसकी सटीक जानकारी और आवेदन की मौजूदा स्थिति के लिए dbtindia.gov.in और birac.nic.in पर मौजूदा डीबीटी-बिराक कॉल देखें, या पोर्टल के माध्यम से सीधे संपर्क करें।
Ramalingaswami fellowship ke liye apply kaise kare?
डीबीटी-बिराक कॉल खुलने पर dbtindia.gov.in या birac.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन करें, जिसमें डिग्री, विदेशी शोध अनुभव का प्रमाण, शोध प्रस्ताव और भारतीय होस्ट संस्थान की स्वीकृति जमा करनी होती है।
Ramalingaswami fellowship ka status kaise check kare?
dbtindia.gov.in और birac.nic.in पर मौजूदा डीबीटी-बिराक कॉल देखें, या पोर्टल के माध्यम से सीधे संपर्क करें, क्योंकि शोध अनुदान राशि और स्टेटस हर साइकिल में संशोधित हो सकते हैं।
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