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पिलग्रिमेज रिजुविनेशन एंड स्पिरिचुअल ऑगमेंटेशन ड्राइव (PRASHAD)

संक्षिप्त जानकारी

PRASHAD पर्यटन मंत्रालय की एक 100% केंद्रीय वित्तपोषित योजना है, जो 2014-15 में शुरू हुई और चिन्हित धार्मिक स्थलों पर तीर्थयात्रा व विरासत बुनियादी ढांचा बनाती है। PRASHAD व्यक्तियों को नहीं बल्कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को सड़कों, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटक सुविधाओं के लिए फंड देती है। राज्यों में 40 से अधिक परियोजनाएं मंजूर हो चुकी हैं। व्यक्ति आवेदन नहीं कर सकते।

आधिकारिक पोर्टल पर आवेदन करें ↗ हेल्पलाइन: 1800-11-1363 (Incredible India tourist helpline)
Benefit
तीर्थस्थलों के पर्यटन बुनियादी ढांचे के लिए राज्यों को 100% केंद्रीय फंडिंग
Maximum benefit
Project-based central assistance to States/UTs (no fixed per-person amount)
How to apply
Not applicable — projects proposed by State/UT governments
Helpline
1800-11-1363 (Incredible India tourist helpline)

PRASHAD योजना क्या है?

PRASHAD, यानी पिलग्रिमेज रिजुविनेशन एंड स्पिरिचुअल, हेरिटेज ऑगमेंटेशन ड्राइव, पर्यटन मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है जो 2014-15 में शुरू हुई। PRASHAD भारत के प्रमुख तीर्थयात्रा और विरासत स्थलों पर बुनियादी ढांचे को विकसित और अपग्रेड करती है ताकि भक्तों और पर्यटकों को सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक आरामदायक पहुंच मिले। यह योजना पहले PRASAD नाम से जानी जाती थी और अक्टूबर 2017 में इसका नाम बदलकर PRASHAD किया गया।

पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, PRASHAD चिन्हित तीर्थयात्रा और विरासत स्थलों पर पर्यटन बुनियादी ढांचे के लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को वित्तीय सहायता देती है। यह योजना किसी स्थल के आसपास की भौतिक संरचनाओं को फंड करती है, यह मंदिरों, ट्रस्टों या व्यक्तिगत तीर्थयात्रियों को अनुदान नहीं है।

मुख्य उद्देश्य

  • स्थानीय आर्थिक वृद्धि और रोजगार के लिए तीर्थयात्रा पर्यटन की क्षमता का उपयोग करना।
  • तीर्थस्थलों को योजनाबद्ध, टिकाऊ और एकीकृत तरीके से विकसित करना।
  • धार्मिक स्थलों पर समुदाय-आधारित विकास और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना।

मुख्य विशेषताएं

  • दिशानिर्देशों के तहत कवर किए गए घटकों के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा 100% केंद्रीय फंडिंग
  • लाभार्थी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं, जो स्थल प्रस्तावित करते हैं और काम लागू करते हैं।
  • राज्यों में दर्जनों तीर्थ शहरों में कवरेज; लॉन्च के बाद से 40 या अधिक परियोजनाएं मंजूर हो चुकी हैं।
  • यह योजना बुनियादी ढांचा बनाने और बनाए रखने के लिए निजी हितधारकों व NGO के साथ सहयोग को प्रोत्साहित करती है।

PRASHAD योजना के लिए कौन पात्र है?

PRASHAD एक बुनियादी ढांचा योजना है, इसलिए पात्रता इस बारे में है कि कौन-सी सरकारें और स्थल योग्य हैं, न कि व्यक्तिगत आवेदकों के बारे में।

PRASHAD सहायता पाने के पात्र:

  • राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, जो प्रस्ताव और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर्यटन मंत्रालय को जमा करते हैं।
  • चिन्हित तीर्थयात्रा और विरासत स्थल जिन्हें मंत्रालय एक व्यवहार्य DPR और उपलब्ध भूमि के आधार पर मूल्यांकित और मंजूर करता है।

आप आवेदन नहीं कर सकते यदि:

  • आप व्यक्ति, तीर्थयात्री, पुजारी या निजी मंदिर ट्रस्ट हैं जो फंड चाहते हैं — व्यक्ति PRASHAD के तहत पैसे के लिए आवेदन नहीं कर सकते
  • आप एक निजी डेवलपर हैं जो सीधे अनुदान की उम्मीद कर रहे हैं। निजी पक्ष केवल राज्य द्वारा चुनी गई क्रियान्वयन एजेंसी के रास्ते से हिस्सा ले सकते हैं; वे स्टैंडअलोन PRASHAD अनुदान के लिए पात्र नहीं हैं।

यही वह बिंदु है जहां ज्यादातर पाठक गलती करते हैं: PRASHAD किसी स्थल पर सार्वजनिक बुनियादी ढांचा बनाती है; यह उस जगह आने वाले या उसे चलाने वाले लोगों को पैसा नहीं देती।

PRASHAD प्रस्ताव के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?

ये किसी नागरिक द्वारा नहीं, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा जमा किए जाते हैं।

दस्तावेज़ अनिवार्य नोट्स
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) हां तीर्थस्थल के लिए स्थल योजना, घटक और लागत अनुमान
भूमि प्रमाणपत्र के साथ राज्य/केंद्र शासित प्रदेश प्रस्ताव हां काम के लिए भार-मुक्त भूमि उपलब्ध होनी चाहिए
उपयोगिता और प्रगति रिपोर्ट हां केंद्रीय फंड की बाद की किस्तें जारी होने के लिए जरूरी

PRASHAD के लिए आवेदन कैसे करें (राज्य प्रस्ताव मार्ग) (PRASHAD apply kaise kare)

कोई नागरिक आवेदन नहीं है। रास्ता संस्थागत है:

  1. राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पर्यटन क्षमता वाले किसी तीर्थयात्रा या विरासत स्थल की पहचान करता है और काम व लागत को कवर करती एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करता है।
  2. राज्य अपने पर्यटन विभाग के जरिए प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय को जमा करता है।
  3. मंत्रालय मूल्यांकन और मंजूरी देता है, और केंद्रीय फंड की पहली किस्त जारी करता है।
  4. राज्य/केंद्र शासित प्रदेश काम लागू करने के लिए एक क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त करता है, सड़कें, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, साइनेज और सुविधाएं।
  5. राज्य उपयोगिता और प्रगति रिपोर्ट जमा करता है, जिसके आधार पर मंत्रालय आगे की किस्तें जारी करता है, और पूरा होने पर संचालन व रखरखाव का जिम्मा लेता है।

अगर आप कोई निवासी हैं जो किसी तीर्थ शहर में कोई सुविधा चाहते हैं, तो व्यावहारिक कदम यह है कि आप अपने राज्य पर्यटन विभाग तक इसे पहुंचाएं, जो प्रस्ताव प्रक्रिया का मालिक है।

कितनी PRASHAD परियोजनाएं मंजूर हुई हैं?

पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की शुरुआत तक PRASHAD के तहत 54 परियोजनाएं मंजूर हो चुकी थीं, जिनमें से 31 पूरी तरह पूर्ण हो चुकी थीं, एक साल पहले के 48 मंजूर और 26 पूर्ण से बढ़कर। मंजूर काम आंध्र प्रदेश, बिहार, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे विविध राज्यों के तीर्थस्थलों में फैले हुए हैं। 2025-26 के केंद्रीय बजट में चल रहे PRASHAD कार्यों को पूरा करने के लिए लगभग Rs 240 करोड़ रखे गए। प्रगति असमान है: एक संसदीय पैनल ने 2014-15 में शुरू हुई कुछ पुरानी परियोजनाओं में लगातार देरी की ओर इशारा किया है, यही कारण है कि मंत्रालय अब बाद की किस्तें सख्ती से उपयोगिता और भौतिक प्रगति के मुकाबले जारी करता है।

PRASHAD कितनी राशि देती है?

PRASHAD पात्र बुनियादी ढांचा घटकों के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा 100% केंद्रीय रूप से वित्तपोषित है। कोई तय प्रति-व्यक्ति या प्रति-परियोजना सीमा सार्वभौमिक आंकड़े के रूप में प्रकाशित नहीं है; राशि हर स्थल की मंजूर DPR पर निर्भर करती है। फंड राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को किस्तों में मिलता है और भौतिक प्रगति व पहले जारी राशि के उचित उपयोग से जुड़ा होता है। चूंकि पैसा सार्वजनिक कार्यों, पहुंच मार्ग, पेयजल, शौचालय, कचरा प्रबंधन, पार्किंग और पर्यटक सुविधा पर खर्च होता है, इसका लाभ किसी एक व्यक्ति के बजाय स्थल पर आने वाले हर आगंतुक को मिलता है।

PRASHAD किस तरह के काम फंड करती है?

योजना दिशानिर्देशों के अनुसार, PRASHAD यह कवर करती है:

  • तीर्थस्थल तक पहुंच मार्ग, पैदल रास्ते और आखिरी-मील कनेक्टिविटी।
  • प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता।
  • पार्किंग, सुरक्षा बुनियादी ढांचा और दिशा-सूचक साइनेज।
  • पर्यटक सुविधा और व्याख्या केंद्र।
  • तीर्थस्थल के आसपास विरासत संरक्षण और सौंदर्यीकरण।

मदद और अधिक जानकारी

  • PRASHAD योजना पेज: tourism.gov.in/prashad-scheme
  • इंक्रेडिबल इंडिया 24x7 पर्यटक हेल्पलाइन: 1800-11-1363
  • राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पर्यटन विभाग, जो किसी तीर्थस्थल पर परियोजना का प्रस्ताव देने या पूछताछ करने के लिए सही शुरुआती बिंदु है।

आवश्यक दस्तावेज़

Detailed Project Report (DPR)
Prepared by the State/UT for the proposed pilgrimage site, with cost estimates and site plans.
State/UT proposal and land availability certificate
The state must own or provide encumbrance-free land for the infrastructure works.
Utilisation and progress reports
Required from the implementing agency to release subsequent instalments of central funds.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कोई व्यक्ति PRASHAD योजना के लिए आवेदन कर सकता है?

नहीं। PRASHAD एक बुनियादी ढांचा योजना है, कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं। वित्तीय सहायता राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को तीर्थस्थलों पर पर्यटन कार्यों के लिए मिलती है, न कि व्यक्तियों, तीर्थयात्रियों या निजी मंदिरों को जो खुद आवेदन करते हैं। व्यक्ति PRASHAD के तहत पैसे के लिए आवेदन नहीं कर सकते।

PRASHAD का पूरा नाम क्या है?

PRASHAD का मतलब है पिलग्रिमेज रिजुविनेशन एंड स्पिरिचुअल, हेरिटेज ऑगमेंटेशन ड्राइव। इसे पर्यटन मंत्रालय ने 2014-15 में शुरू किया था और अक्टूबर 2017 में PRASAD से बदलकर PRASHAD किया गया।

PRASHAD के तहत केंद्र कितना फंड देता है?

PRASHAD परियोजनाएं दिशानिर्देशों के तहत कवर किए गए घटकों के लिए पर्यटन मंत्रालय द्वारा 100% केंद्रीय रूप से वित्तपोषित होती हैं। मंजूर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और पहले जारी राशि के संतोषजनक उपयोग के मुकाबले धनराशि राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को किस्तों में जारी होती है।

PRASHAD योजना किन कामों के लिए भुगतान करती है?

PRASHAD चिन्हित धार्मिक स्थलों पर आखिरी-मील तीर्थयात्रा बुनियादी ढांचे को फंड करती है — पहुंच मार्ग, पैदल रास्ते, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, कचरा प्रबंधन, पार्किंग, दिशा-सूचक साइनेज, पर्यटक सुविधा और व्याख्या केंद्र, और विरासत संरक्षण।

PRASHAD के तहत तीर्थ स्थल कैसे चुना जाता है?

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकार पर्यटन मंत्रालय को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के साथ किसी स्थल का प्रस्ताव भेजती है। मंत्रालय इसका मूल्यांकन करता है और मंजूरी मिलने पर, स्थल को राज्य द्वारा चुनी गई क्रियान्वयन एजेंसी विकसित करती है। राज्यों में 40 या अधिक परियोजनाएं चिन्हित की गई हैं।

PRASHAD परियोजनाओं को धरातल पर कौन लागू करता है?

PRASHAD परियोजनाएं राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा चुनी गई क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा लागू की जाती हैं, पर्यटन मंत्रालय फंड और समग्र निगरानी देता है। पूरा होने के बाद भूमि, संचालन व रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य की होती है।

PRASHAD परियोजना की स्थिति कैसे जानें?

चूंकि व्यक्ति आवेदन नहीं करते, कोई नागरिक-स्तरीय स्थिति-जांच पोर्टल नहीं है। अपने क्षेत्र में किसी PRASHAD परियोजना की प्रगति जानने के लिए अपने राज्य के पर्यटन विभाग से या tourism.gov.in/prashad-scheme पर संपर्क करें।

अपने क्षेत्र में तीर्थस्थल सुविधा के लिए मांग कैसे उठाएं?

1) अपने राज्य के पर्यटन विभाग से संपर्क करें। 2) स्थल का विस्तृत विवरण देकर PRASHAD के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की मांग करें। 3) राज्य इसे पर्यटन मंत्रालय को भेजता है, जो इसे मूल्यांकन कर मंजूरी देता है।

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लेखक: Aapt Dubey

समीक्षक: Rishu Dubey

अंतिम तथ्य-जांच: 2 अगस्त 2026