नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के क्रियान्वयन हेतु केंद्र प्रायोजित योजना
PCR अधिनियम, 1955 और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के क्रियान्वयन हेतु केंद्र प्रायोजित योजना इन दो कानूनों को लागू करने के लिए राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय अनुदान देती है, जिसमें अत्याचार पीड़ितों को Rs 85,000 से Rs 8,25,000 तक की राहत और अंतर-जातीय विवाह के लिए Rs 2.5 लाख तक की राशि दी जाती है। व्यक्ति नहीं, राज्य केंद्रीय अनुदान के लिए आवेदन करते हैं।
यह योजना क्या है?
नागरिक अधिकार संरक्षण (PCR) अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के क्रियान्वयन हेतु केंद्र प्रायोजित योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का एक वित्त पोषण कार्यक्रम है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के अनुसार, यह राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता देती है ताकि वे उन दो केंद्रीय कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें जो अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को अस्पृश्यता और अत्याचार से बचाते हैं।
यह व्यक्तिगत लाभ योजना नहीं है। यह एक संस्थागत अनुदान है जो केंद्र से राज्यों की ओर बहता है। राज्य इसके बदले में यह पैसा पीड़ित राहत, प्रवर्तन तंत्र और जागरूकता पर खर्च करते हैं। कोई नागरिक सीधे "इस योजना" के लिए आवेदन नहीं करता; इसके बजाय पीड़ित स्थानीय प्रशासन के पास राहत के लिए आवेदन करता है, जिसे राज्य इन सामूहिक फंड से भुगतान करता है।
नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 अस्पृश्यता की प्रथा को अपराध बनाता है। SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ अपराधों की विशेष श्रेणियां बनाता है और कठोर सजा, विशेष न्यायालय और पीड़ितों को अनिवार्य राहत निर्धारित करता है।
योजना किसे वित्त पोषित करती है?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के अनुसार, योजना के तहत केंद्रीय सहायता निम्नलिखित मुख्य मदों में उपयोग होती है:
- अत्याचार पीड़ितों की राहत और पुनर्वास; SC/ST (PoA) नियमों की अनुसूची में तय पैमाने पर भुगतान, अपराध के आधार पर Rs 85,000 से Rs 8,25,000 तक।
- सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए अंतर-जातीय विवाह प्रोत्साहन।
- प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना — विशेष न्यायालय स्थापित करना, विशेष सरकारी वकील नियुक्त करना, और SC/ST संरक्षण प्रकोष्ठ व विशेष पुलिस थाने चलाना।
- जागरूकता निर्माण, प्रचार, संगोष्ठियां और अधिकार-जागरूकता कार्यक्रम ताकि पीड़ित जान सकें कि सुरक्षा और राहत कैसे पाई जाए।
- कोर्ट में उपस्थित होने वाले पीड़ितों और गवाहों को यात्रा और भरण-पोषण भत्ता।
राहत राशि चरणों में जारी की जाती है। एक हिस्सा FIR दर्ज होने पर, एक हिस्सा चार्जशीट दाखिल होने पर, और शेष सजा होने पर दिया जाता है, जैसा कि नियमों में तय है।
इस योजना के लिए कौन पात्र है?
क्योंकि योजना की दो परतें हैं, प्रत्येक के लिए पात्रता अलग है।
केंद्रीय अनुदान के लिए (योजना ही):
- राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन केंद्रीय सहायता पाने के पात्र हैं। वे मंत्रालय को प्रस्ताव और उपयोगिता प्रमाण-पत्र सौंपते हैं।
- व्यक्ति केंद्रीय अनुदान के लिए आवेदन नहीं कर सकते। योजना के लिए कोई नागरिक-केंद्रित आवेदन फॉर्म नहीं है।
योजना से भुगतान होने वाली पीड़ित राहत के लिए (कौन लाभान्वित होता है):
- कोई व्यक्ति जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है और SC/ST (PoA) अधिनियम के तहत दर्ज अपराध का पीड़ित है, राहत का पात्र है।
- जहां नियमों में प्रावधान है, वहां मृतक पीड़ित के आश्रित भी पात्र हैं।
पीड़ित राहत के लिए कौन पात्र नहीं है:
- वह व्यक्ति जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, PoA अधिनियम के तहत राहत का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि यह अधिनियम केवल इन समुदायों की रक्षा करता है।
- ऐसा दावा जो अधिनियम के तहत दर्ज FIR द्वारा समर्थित नहीं है, इस योजना के तहत राहत के लिए पात्र नहीं है।
कौन से दस्तावेज चाहिए?
| दस्तावेज | अनिवार्य | नोट्स |
|---|---|---|
| FIR / अत्याचार मामला रिकॉर्ड | हां (पीड़ित राहत के लिए) | SC/ST (PoA) अधिनियम के तहत दर्ज मामला दावे का आधार है |
| जाति प्रमाण-पत्र | हां (पीड़ित राहत के लिए) | पीड़ित के SC या ST होने का प्रमाण |
| बैंक खाता विवरण | हां | राहत पीड़ित के खाते में भुगतान की जाती है |
| विवाह और दोनों पति-पत्नी के जाति प्रमाण-पत्र | अंतर-जातीय विवाह प्रोत्साहन के लिए | केवल उसी घटक के लिए जरूरी |
इस योजना के तहत आवेदन कैसे करें (yojana me apply kaise kare)
क्योंकि यह केंद्र प्रायोजित योजना है, इसके दो अलग मार्ग हैं।
राहत चाहने वाले पीड़ित का मार्ग (व्यक्ति):
- सुनिश्चित करें कि SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की संबंधित धाराओं के तहत पुलिस थाने में FIR दर्ज हो।
- जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक के कार्यालय से संपर्क करें, जो SC/ST (PoA) नियमों के तहत राहत मंजूर करने के लिए जिम्मेदार है।
- अपना जाति प्रमाण-पत्र, FIR प्रति और बैंक विवरण जमा करें; जिला प्रशासन राहत को संसाधित करता है और मामले की प्रगति के साथ चरणों में इसे आपके खाते में जमा करता है।
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का मार्ग (संस्थागत अनुदान):
- राज्य सामाजिक कल्याण या SC कल्याण विभाग प्रवर्तन, राहत और जागरूकता पर खर्च की योजना के साथ एक वार्षिक प्रस्ताव तैयार करता है।
- यह प्रस्ताव, पहले के अनुदानों के उपयोगिता प्रमाण-पत्र के साथ, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को सौंपा जाता है।
- मंत्रालय स्वीकृत खर्च का केंद्रीय हिस्सा राज्य को जारी करता है।
वित्त पोषण पैटर्न
विभाग के अनुसार, योजना साझा-वित्त पोषण के आधार पर चलती है। अधिकांश राज्यों के लिए केंद्र राज्य की प्रतिबद्ध देयता से अधिक खर्च का 50% वहन करता है, और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केंद्रीय हिस्सा अधिक है। कुछ मदें, जैसे विशेष न्यायालयों के लिए प्रतिपूर्ति, समय-समय पर अधिसूचित मानदंडों का पालन करती हैं।
मदद कहां से लें
- पीड़ित राहत और पुनर्वास के लिए राज्य SC/ST कल्याण विभाग या जिला मजिस्ट्रेट का कार्यालय।
- योजना दिशानिर्देशों और राज्य प्रस्तावों के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, socialjustice.gov.in।
क्योंकि राहत SC/ST (PoA) नियमों के तहत एक कानूनी अधिकार है, राहत दावा दाखिल करने के लिए किसी भी एजेंट या बिचौलिये को शुल्क नहीं देना पड़ता। पीड़ितों को केवल पुलिस और जिला प्रशासन से ही व्यवहार करना चाहिए।
आवश्यक दस्तावेज़
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कोई व्यक्ति इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है?
केंद्रीय अनुदान के लिए कोई व्यक्ति सीधे आवेदन नहीं करता — यह योजना राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्त पोषित करती है, जो सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को आवेदन करते हैं। हालांकि, अत्याचार का पीड़ित राहत और पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन (जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक) के पास आवेदन करता है, जिसे राज्य इन्हीं फंड से भुगतान करता है।
अत्याचार पीड़ित को कितनी राहत मिलती है?
अपराध की प्रकृति के आधार पर राहत Rs 85,000 से Rs 8,25,000 तक होती है, जैसा कि SC/ST (अत्याचार निवारण) नियमों की अनुसूची में तय है। यह राशि मामले की प्रगति — FIR, चार्जशीट और सजा — से जुड़े चरणों में जारी की जाती है।
योजना पीड़ित राहत के अलावा और क्या भुगतान करती है?
योजना अंतर-जातीय विवाह प्रोत्साहन, प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करना (विशेष न्यायालय, विशेष सरकारी वकील, SC/ST संरक्षण प्रकोष्ठ), जागरूकता निर्माण और पीड़ितों के पुनर्वास को वित्त पोषित करती है। पीड़ितों के लिए राहत का पैमाना SC/ST (PoA) नियमों द्वारा तय किया गया है।
पीड़ित राहत राशि कौन देता है?
राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश सीधे पीड़ित को भुगतान करता है। केंद्र इस केंद्र प्रायोजित योजना के तहत खर्च का एक हिस्सा (अधिकांश राज्यों के लिए आमतौर पर 50%, उनकी प्रतिबद्ध देयता से अधिक, पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अधिक केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ) वापस करता है।
अंतर-जातीय विवाह प्रोत्साहन क्या है?
डॉ. आंबेडकर अंतर-जातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक एकीकरण योजना के तहत, जहां एक साथी अनुसूचित जाति से है, ऐसे जोड़े को Rs 2.5 लाख तक का प्रोत्साहन मिल सकता है। यह अलग से प्रशासित होता है लेकिन विभाग के इसी सामाजिक-एकीकरण प्रयास का हिस्सा है।
यह योजना किन कानूनों को लागू करने में मदद करती है?
दो कानून — नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 (जो अस्पृश्यता को समाप्त करता है) और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989। योजना राज्यों को दोनों कानूनों को लागू करने वाले तंत्र को चलाने के लिए पैसा देती है।
पीड़ित राहत के लिए स्टेटस या आवेदन कैसे ट्रैक करें?
कोई केंद्रीय ऑनलाइन ट्रैकिंग पोर्टल नहीं है — पीड़ित को अपने जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक के कार्यालय से सीधे संपर्क करके FIR, चार्जशीट और सजा के चरण के आधार पर राहत की स्थिति पूछनी चाहिए, क्योंकि राशि इन्हीं चरणों से जुड़ी होकर जारी होती है।
SC ST atrocity relief ke liye apply kaise kare?
सबसे पहले SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की संबंधित धाराओं के तहत पुलिस थाने में FIR दर्ज कराएं, फिर जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक के कार्यालय से संपर्क करें और अपना जाति प्रमाण-पत्र, FIR प्रति और बैंक विवरण जमा करें। कोई व्यक्ति सीधे केंद्रीय योजना को आवेदन नहीं करता।
atrocity relief ka status kaise check kare?
इसका कोई केंद्रीय ऑनलाइन ट्रैकिंग पोर्टल नहीं है। राहत की स्थिति जानने के लिए सीधे अपने जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक के कार्यालय से संपर्क करें, क्योंकि राशि FIR, चार्जशीट और सजा जैसे चरणों से जुड़ी होकर जारी होती है।
संबंधित योजनाएं (सामाजिक कल्याण और सशक्तिकरण)
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