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दीन दयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना (DDRS)

संक्षिप्त जानकारी

दीन दयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना (DDRS) पंजीकृत NGO और स्वैच्छिक संगठनों को दिव्यांगजनों के लिए पुनर्वास परियोजनाएं — जैसे विशेष स्कूल, अर्ली इंटरवेंशन सेंटर और हाफ-वे होम — 8 प्रोजेक्ट मॉडलों में चलाने के लिए ग्रांट-इन-एड देती है। कम से कम 2 साल से पंजीकृत संगठन NGO दर्पण और e-अनुदान पोर्टल के माध्यम से आवेदन करते हैं; यह सीधा नागरिक लाभ नहीं है।

Benefit
दिव्यांगजन पुनर्वास परियोजनाएं चलाने वाले स्वैच्छिक संगठनों को ग्रांट-इन-एड
Maximum benefit
Varies by approved project cost (grant-in-aid to NGOs)
How to apply
Online (NGO Darpan + e-anudaan portal)
Helpline
14456

दीन दयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना (DDRS) क्या है?

दीन दयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना (DDRS), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) की एक ग्रांट-इन-एड योजना है। DEPwD के अनुसार, योजना का उद्देश्य ऐसा सक्षम वातावरण बनाना है जो दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर, समता, सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण सुनिश्चित करे, और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 को लागू करने के लिए स्वैच्छिक कार्रवाई को प्रोत्साहित करे।

DDRS व्यक्तियों को सीधे पैसा नहीं देती। इसके बजाय, यह पंजीकृत गैर-सरकारी और स्वैच्छिक संगठनों को ग्रांट-इन-एड भेजती है ताकि वे अपने समुदायों में दिव्यांगजनों की सेवा करने वाली पुनर्वास परियोजनाएं स्थापित कर सकें और चला सकें। यह अनुदान सामान्यतः स्वीकृत परियोजना की आवर्ती व गैर-आवर्ती लागतों को कवर करता है, जैसे स्टाफ वेतन, थेरेपी, शिक्षण सामग्री और चलाने का खर्च।

8 प्रोजेक्ट मॉडल

DEPwD के अनुसार, DDRS हस्तक्षेप के आठ मॉडलों को फंड करती है:

  1. अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, क्रॉस-डिसेबिलिटी, प्री-स्कूल, घर व समुदाय-आधारित पुनर्वास सहित।
  2. बधिर व श्रवण-बाधितों के लिए स्कूल, पुनर्वास घटक के साथ।
  3. नेत्रहीन व कम दृष्टि वालों के लिए स्कूल, कम-दृष्टि सेंटरों सहित।
  4. बहु-दिव्यांगता स्कूल, बौद्धिक दिव्यांगता, सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज़्म व मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के लिए।
  5. कुष्ठ रोग से ठीक हुए व्यक्तियों का पुनर्वास, घर व समुदाय-आधारित विकल्पों के साथ।
  6. मनोसामाजिक पुनर्वास: मानसिक बीमारी से उबर रहे व्यक्तियों के लिए हाफ-वे होम।
  7. विशेष अधिगम सेंटर, विशिष्ट अधिगम-अक्षमता के लिए अर्ली इंटरवेंशन।
  8. थेरेपी व काउंसलिंग सेंटर; क्रॉस-डिसेबिलिटी।

DDRS के लिए कौन पात्र है?

संगठन आवेदन कर सकता है यदि:

  • यह सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860, इंडियन ट्रस्ट्स एक्ट 1882, या कंपनीज़ एक्ट 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत है।
  • यह उस अवधि के ऑडिटेड लेखे के साथ कम से कम 2 साल से पंजीकृत और कार्यरत है।
  • इसकी उचित गवर्निंग बॉडी, गैर-भेदभावपूर्ण नीतियां और मजबूत वित्तीय स्थिति है।
  • इसके पास NGO दर्पण (नीति आयोग) यूनीक ID है।

कौन आवेदन नहीं कर सकता:

  • कोई दिव्यांग व्यक्ति नकद लाभ के लिए सीधे आवेदन नहीं कर सकता — DDRS संगठनों को फंड करती है, व्यक्तियों को नहीं। दिव्यांग व्यक्ति के लिए सही रास्ता है सेवाओं के लिए किसी DDRS-समर्थित NGO से संपर्क करना।
  • 2 साल से कम पुराने, या ऑडिटेड लेखे और उचित गवर्निंग संरचना के बिना नए बने संगठन पात्र नहीं हैं।
  • लाभ-उद्देश्य या भेदभावपूर्ण प्रवेश नीति वाले संगठन योग्य नहीं हैं।

यह DDRS के बारे में सबसे ज़्यादा गलत समझा जाने वाला बिंदु है: यह एक संस्थागत अनुदान योजना है। दिव्यांगजन अंतिम लाभार्थी हैं, लेकिन उन्हें मदद फंड की गई NGO के माध्यम से मिलती है — स्कूली शिक्षा, थेरेपी, अर्ली इंटरवेंशन, व्यावसायिक प्रशिक्षण व काउंसलिंग — सीधे हस्तांतरण के बजाय।

DDRS के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?

दस्तावेज़ अनिवार्य नोट्स
पंजीकरण प्रमाणपत्र हां सोसाइटी/ट्रस्ट/सेक्शन 8 कंपनी
NGO दर्पण यूनीक ID हां नीति आयोग पोर्टल पर पूर्व-पंजीकरण
ऑडिटेड लेखा (2 साल) हां कार्यरत होने और वित्त का प्रमाण
प्रबंधन समिति व स्टाफ विवरण हां गवर्निंग बॉडी और योग्य स्टाफ
लाभार्थी विवरण व परियोजना प्रस्ताव हां जिस मॉडल के लिए आवेदन हो और सेवित व्यक्ति
स्टाम्प पेपर पर क्षतिपूर्ति बॉन्ड हां अनुदान स्वीकृति की शर्त

DDRS के लिए आवेदन कैसे करें

  1. अपने संगठन को NGO दर्पण पोर्टल (ngodarpan.gov.in) पर पंजीकृत करें और यूनीक ID प्राप्त करें, यह एक पूर्वापेक्षा है।
  2. NGO लॉगिन का उपयोग करके e-अनुदान (ग्रांट्स) पोर्टल पर grants.depwd.gov.in पर लॉगिन करें।
  3. DDRS योजना और जिस प्रोजेक्ट मॉडल को चलाना चाहते हैं उसे चुनें, फिर संगठन, स्टाफ और लाभार्थी विवरण भरकर आवेदन पूरा करें।
  4. सहायक दस्तावेज़ अपलोड करें — पंजीकरण प्रमाणपत्र, ऑडिटेड लेखा, गवर्निंग बॉडी सूची, परियोजना प्रस्ताव और क्षतिपूर्ति बॉन्ड।
  5. आवेदन जमा करें। इसके बाद यह जिला अधिकारियों और राज्य-स्तरीय समितियों द्वारा जांचा जाता है, और नई परियोजनाओं को स्वीकृति से पहले स्क्रीनिंग समिति की मंज़ूरी चाहिए।
  6. स्वीकृति पर, ग्रांट-इन-एड परियोजना चलाने के लिए संगठन को जारी की जाती है, रिपोर्टिंग व उपयोग शर्तों के अधीन।

DDRS कितना लाभ देती है?

DDRS हर स्वीकृत परियोजना की मंज़ूर लागत के अनुसार ग्रांट-इन-एड देती है: कोई एक निश्चित राशि नहीं है, क्योंकि अनुदान मॉडल, लाभार्थियों की संख्या और स्वीकृत स्टाफिंग व चलाने की लागत पर निर्भर करता है। भुगतान योजना के लागत मानदंडों के अनुसार होता है और स्वीकृति व संतोषजनक उपयोग पर जारी किया जाता है। चूंकि सटीक प्रति-परियोजना आंकड़े योजना के अनुदान मानदंडों में तय हैं और समय-समय पर संशोधित होते हैं, आवेदक संगठन को प्रस्ताव का बजट बनाने से पहले DEPwD से वर्तमान लागत मानदंड पुष्टि करने चाहिए।

सहायता और सत्यापन के लिए कहां जाएं

  • दिव्यांगजनों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 14456
  • ग्रांट्स पोर्टल: grants.depwd.gov.in
  • विभाग पोर्टल: depwd.gov.in

DDRS की लागत मानदंड, प्रोजेक्ट मॉडल और आवेदन चरण बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले depwd.gov.in पर वर्तमान दिशानिर्देश सत्यापित करें। ग्रांट-इन-एड के लिए आवेदन करने पर कोई शुल्क नहीं लगता, और स्क्रीनिंग सरकारी समितियों द्वारा की जाती है।

आवश्यक दस्तावेज़

Registration certificate of the organisation
Registered under the Societies Registration Act 1860, Indian Trusts Act 1882, or Section 8 of the Companies Act 2013.
NGO Darpan (NITI Aayog) unique ID
Pre-registration on the NGO Darpan portal is required before applying.
Audited accounts for the last 2 years
The organisation must have been registered and functioning for a minimum of 2 years.
Management committee and staff details
Governing body list and qualified rehabilitation staff.
Beneficiary details and project proposal
Details of persons with disabilities to be served and the model applied for.
Indemnity bond on stamp paper
Required as part of the grant-in-aid sanction conditions.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

DDRS किसे फंड करती है?

दीन दयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना पंजीकृत स्वैच्छिक संगठनों को दिव्यांगजन पुनर्वास परियोजनाएं चलाने के लिए ग्रांट-इन-एड देती है। यह 8 प्रोजेक्ट मॉडलों को सहयोग देती है, जिनमें अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, बधिर व नेत्रहीनों के लिए विशेष स्कूल, बहु-दिव्यांगता स्कूल, हाफ-वे होम और थेरेपी व काउंसलिंग सेंटर शामिल हैं।

DDRS ग्रांट-इन-एड के लिए कौन आवेदन कर सकता है?

कम से कम 2 साल से सक्रिय, ठोस लेखा-जोखा और उचित गवर्निंग बॉडी वाले पंजीकृत स्वैच्छिक संगठन — सोसाइटी, ट्रस्ट या सेक्शन 8 कंपनियां — आवेदन कर सकते हैं। व्यक्तिगत दिव्यांगजन सीधे आवेदन नहीं कर सकते; वे उन NGO के माध्यम से लाभान्वित होते हैं जो DDRS परियोजनाएं चलाते हैं।

क्या कोई दिव्यांग व्यक्ति सीधे DDRS के लिए आवेदन कर सकता है?

नहीं। DDRS संगठनों के लिए ग्रांट-इन-एड योजना है, व्यक्तियों के लिए सीधा नकद लाभ नहीं। दिव्यांगजन को स्कूली शिक्षा, थेरेपी या व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सेवाएं उन NGO से मिलती हैं जिन्हें इस योजना के तहत फंड मिलता है, इसलिए सही तरीका है किसी DDRS-समर्थित संगठन से संपर्क करना।

DDRS किन प्रोजेक्ट मॉडलों को सहयोग देती है?

DDRS 8 मॉडलों को सहयोग देती है: अर्ली इंटरवेंशन सेंटर, बधिर/श्रवण-बाधित के लिए स्कूल, नेत्रहीन/कम दृष्टि वालों के लिए स्कूल, बहु-दिव्यांगता स्कूल, कुष्ठ रोग से ठीक हुए व्यक्तियों का पुनर्वास, मनोसामाजिक हाफ-वे होम, विशेष अधिगम-अक्षमता सेंटर, और क्रॉस-डिसेबिलिटी थेरेपी व काउंसलिंग सेंटर।

कोई NGO DDRS के लिए कैसे आवेदन करता है?

संगठन पहले NGO दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण कर एक यूनीक ID प्राप्त करता है, फिर grants.depwd.gov.in पर e-अनुदान (ग्रांट्स) पोर्टल के माध्यम से अपनी परियोजना का आवेदन जमा करता है। आवेदन स्वीकृति से पहले जिला और राज्य समितियों द्वारा जांचे जाते हैं।

DDRS किस मंत्रालय द्वारा चलाई जाती है?

DDRS सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) द्वारा चलाई जाती है।

आवेदन के लिए संगठन कितने समय से मौजूद होना चाहिए?

आवेदक संगठन को DDRS ग्रांट-इन-एड के लिए पात्र होने से पहले कम से कम 2 साल से पंजीकृत और कार्यरत होना चाहिए, उस अवधि के ऑडिटेड लेखा और उचित प्रबंधन संरचना के साथ।

DDRS ग्रांट की मंज़ूरी में कब तक लगता है, स्टेटस कैसे पता करें?

DDRS के लिए कोई निश्चित प्रोसेसिंग टाइमलाइन घोषित नहीं है — आवेदन जिला और राज्य स्तरीय समितियों से होकर गुज़रते हैं। स्टेटस जानने के लिए e-अनुदान पोर्टल grants.depwd.gov.in पर अपने NGO लॉगिन से आवेदन की स्थिति देखें, या DEPwD से सीधे संपर्क करें।

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लेखक: Aapt Dubey

समीक्षक: Rishu Dubey

अंतिम तथ्य-जांच: 1 अगस्त 2026

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